काशी में गंगा की लहरों पर योग साधना, जलयोग कर दिया प्रकृति संरक्षण और विश्व कल्याण का संदेश
वाराणसी। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर नमामि गंगे की टीम ने विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट के सामने मां गंगा की गोद में विशेष ‘जलयोग’ का आयोजन कर योग, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। गंगा की अविरलता, निर्मलता और घाटों की स्वच्छता के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता की।
गंगा की शांत लहरों के बीच जल में खड़े होकर प्रतिभागियों ने विभिन्न योग क्रियाओं का अभ्यास किया। जलयोग के दौरान प्राणायाम, वृक्षासन, ताड़ासन, गरुड़ासन, अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार जैसे योगासनों का प्रदर्शन किया गया। योग साधकों ने जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और विश्व कल्याण की कामना के साथ योगाभ्यास किया। गंगा के पवित्र जल में किए गए इन आसनों ने उपस्थित लोगों को योग और प्रकृति के गहरे संबंध का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान शिव स्तुति, गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र और गंगाष्टकम का सामूहिक पाठ भी किया गया। मंत्रोच्चार और योग साधना से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता से भर गया। गंगा तट पर यह दृश्य श्रद्धा, साधना और प्रकृति के प्रति समर्पण का प्रतीक बन गया।
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा और योग दोनों ही आत्मशुद्धि, शांति और मुक्ति के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि सभ्यता और जीवन की आधारशिला रही हैं। वर्तमान समय में नदियों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक होना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
उन्होंने जलयोग के स्वास्थ्य लाभों पर भी प्रकाश डालते हुए बताया कि जल में वृक्षासन करने से तनाव और वजन नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। ताड़ासन से मानसिक संतुलन बेहतर होता है, जबकि गरुड़ासन एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है। प्राणायाम शरीर और मन दोनों को शुद्ध करने का प्रभावी माध्यम है।
इस अवसर पर महानगर सहसंयोजक सारिका गुप्ता, महानगर प्रभारी पुष्पलता वर्मा, बीना गुप्ता, ममता केसरी, माही केसरी, संदीप चतुर्वेदी, संजय जायसवाल, शालिनी श्रीवास्तव, पूजा यादव सहित सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे।