ईवीएम की एफएलसी पर वाराणसी में कार्यशाला, 21 जिलों के अधिकारियों को मिला प्रशिक्षण

आगामी चुनावों की तैयारियों को गति देने के लिए शुक्रवार को वाराणसी में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) को लेकर अहम कार्यशाला आयोजित की गई। भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की मौजूदगी में हुई कार्यशाला में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी और एफएलसी सुपरवाइजर शामिल हुए। अधिकारियों को ईवीएम की जांच, मॉक पोल और एफएलसी की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।
 

मॉक पोल से लेकर मशीनों की जांच तक सिखाई प्रक्रिया, 14 सितंबर को लखनऊ में होगी तीसरी कार्यशाला

वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त व यूपी के मुख्य निर्वाचन ने कार्यशाला में लिया भाग 

वाराणसी। आगामी चुनावों की तैयारियों को गति देने के लिए शुक्रवार को वाराणसी में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग (एफएलसी) को लेकर अहम कार्यशाला आयोजित की गई। भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की मौजूदगी में हुई कार्यशाला में पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी, उप जिला निर्वाचन अधिकारी और एफएलसी सुपरवाइजर शामिल हुए। अधिकारियों को ईवीएम की जांच, मॉक पोल और एफएलसी की पूरी प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि एफएलसी को लेकर इससे पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों के लिए नोएडा में कार्यशाला आयोजित की जा चुकी है। अब तीसरी कार्यशाला 14 सितंबर को लखनऊ में होगी। इसमें शेष जिलों के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के सभी जिलों में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग शुरू हो जाएगी।

उन्होंने बताया कि एफएलसी के दौरान चुनाव में इस्तेमाल होने वाली प्रत्येक कंट्रोल यूनिट, बैलेट यूनिट और वीवीपैट की बारीकी से जांच की जाती है। मशीन के प्रत्येक बटन और उसकी कार्यप्रणाली को परखा जाता है, ताकि चुनाव से पहले यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी मशीन पूरी तरह दुरुस्त है।

एफएलसी की प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी लिखित सूचना देकर आमंत्रित किया जाता है। उनकी मौजूदगी में मॉक पोल कराया जाता है। इसमें प्रत्येक उम्मीदवार के पक्ष में वोट डालकर मशीन में दर्ज परिणाम का मिलान किया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य ईवीएम की कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच और राजनीतिक दलों की संतुष्टि सुनिश्चित करना है।

एक जिले में एफएलसी की प्रक्रिया करीब दस दिनों तक लगातार चलती है। मशीनों की जांच पूरी होने तक प्रतिदिन सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक कार्य किया जाता है। इसके लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के इंजीनियर मौजूद रहते हैं और पूरी प्रक्रिया जिला निर्वाचन अधिकारी की निगरानी में संपन्न होती है।

कार्यशाला में अधिकारियों को सैद्धांतिक जानकारी के साथ मशीनों पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण भी दिया गया। अधिकारियों ने स्वयं ईवीएम कनेक्ट करने, मॉक पोल कराने और परिणामों की जांच करने की प्रक्रिया समझी। मनीष गर्ग ने एफएलसी के साथ आगामी चुनावों की प्रशासनिक तैयारियों को लेकर भी अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

नवदीप रिणवा ने कहा कि ईवीएम की एफएलसी आगामी चुनाव की तैयारियों का पहला महत्वपूर्ण चरण है। वाराणसी की कार्यशाला के बाद जिलों में इसकी तैयारियां तेज होंगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि 14 सितंबर की लखनऊ कार्यशाला के बाद शेष जिलों में भी एफएलसी शुरू कर दी जाएगी।