रामेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, दर्शन मात्र से दूर होते हैं कष्ट

काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी के कण-कण में महादेव का वास है और यहां स्थित प्रत्येक शिवलिंग की अपनी अलग महिमा है। हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा परिसर के बड़े हनुमान मंदिर में विराजमान प्राचीन रामेश्वर महादेव भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना भगवान श्रीराम ने स्वयं की थी। यही वजह है कि रामेश्वर महादेव को भगवान राम की श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से जुड़ा सिद्ध शिवलिंग माना जाता है।
 

काशी के हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा परिसर के बड़े हनुमान मंदिर में विराजमान हैं प्राचीन रामेश्वर महादेव

भगवान श्रीराम द्वारा स्वयं शिवलिंग स्थापित किए जाने की है धार्मिक मान्यता

प्रदोष पर जलाभिषेक का विशेष महत्व, सुख-शांति और समृद्धि की कामना लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। मान्यता है कि काशी के कण-कण में महादेव का वास है और यहां स्थित प्रत्येक शिवलिंग की अपनी अलग महिमा है। हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा परिसर के बड़े हनुमान मंदिर में विराजमान प्राचीन रामेश्वर महादेव भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना भगवान श्रीराम ने स्वयं की थी। यही वजह है कि रामेश्वर महादेव को भगवान राम की श्रद्धा, भक्ति और संकल्प से जुड़ा सिद्ध शिवलिंग माना जाता है।

प्रदोष पर जलाभिषेक का विशेष महत्व
रामेश्वर महादेव के मंदिर में प्रदोष तिथि पर जलाभिषेक और पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु जल, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भगवान शिव से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि प्रदोष के दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

भगवान राम से जुड़ी है स्थापना की मान्यता
स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी कारण इसका नाम रामेश्वर महादेव पड़ा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि भगवान राम द्वारा स्थापित माने जाने वाले इस शिवलिंग का पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

बड़े हनुमान मंदिर परिसर में विराजमान हैं महादेव
हनुमान घाट स्थित जूना अखाड़ा परिसर का बड़ा हनुमान मंदिर प्राचीन धार्मिक परंपराओं और साधु-संतों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। इसी परिसर में रामेश्वर महादेव के विराजमान होने से यह स्थान भगवान शिव और भगवान राम की भक्ति का संगम माना जाता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम शुरू हो जाता है। भक्त जलाभिषेक, दीप प्रज्ज्वलन और पूजन कर परिवार की सुख-शांति और मंगलकामना करते हैं।

दर्शन से कष्ट दूर होने की आस्था
रामेश्वर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से भगवान के दर्शन और पूजन करने से जीवन के दुख-कष्ट दूर होते हैं। भगवान शिव को आशुतोष कहा गया है, इसलिए भक्त थोड़े से जल और श्रद्धा के साथ भी उन्हें प्रसन्न करने की कामना करते हैं।