गंगा का पानी उतरा तो घाटों पर मिट्टी और कीचड़ का आलम, बढ़ी परेशानी 

गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट से काशीवासियों को राहत मिली है, लेकिन पानी पीछे हटने के बाद घाटों पर गाद और मिट्टी की मोटी परत नई परेशानी बन गई है। अस्सी घाट की सीढ़ियों पर जगह-जगह मिट्टी और गाद जमा होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। लोगों ने पर्व-त्योहारों से पहले घाटों की सफाई अभियान तेज कराने की मांग की है।
 

तीन दिन वृद्धि के बाद घटने लगीं गंगा, तटवर्ती इलाके के लोगों ने महसूस की राहत

पर्व-त्योहार से पहले घाटों की सफाई तेज कराने की मांग

वाराणसी। गंगा के जलस्तर में लगातार गिरावट से काशीवासियों को राहत मिली है, लेकिन पानी पीछे हटने के बाद घाटों पर गाद और मिट्टी की मोटी परत नई परेशानी बन गई है। अस्सी घाट की सीढ़ियों पर जगह-जगह मिट्टी और गाद जमा होने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। लोगों ने पर्व-त्योहारों से पहले घाटों की सफाई अभियान तेज कराने की मांग की है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शुक्रवार दो अक्टूबर को दोपहर 12 बजे वाराणसी में गंगा का जलस्तर 67.42 मीटर दर्ज किया गया। यह चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर से करीब 2.84 मीटर नीचे है। जलस्तर कम होने के बाद अस्सी समेत कई घाटों की सीढ़ियां पानी से बाहर आ गई हैं। हालांकि पानी के साथ आई मिट्टी और गाद सीढ़ियों पर जमा रह गई है।


सीढ़ियों पर फिसलन से परेशानी
अस्सी घाट पर कई स्थानों पर सीढ़ियों पर मिट्टी की मोटी परत दिखाई दे रही है। इससे घाट पर आने-जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर घटने के साथ ही घाटों की सफाई शुरू करा देनी चाहिए, ताकि जमा गाद और मिट्टी को हटाकर सीढ़ियों को सुरक्षित बनाया जा सके।

लोगों के मुताबिक आने वाले दिनों में पर्व और धार्मिक आयोजनों के चलते घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी। ऐसे में समय रहते सफाई नहीं हुई तो लोगों को कीचड़ और गंदगी के बीच घाटों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। नगर निगम से सीढ़ियों के साथ घाटों के किनारों और आसपास के क्षेत्रों में भी विशेष सफाई अभियान चलाने की मांग की गई है।

सफाई व्यवस्था बढ़ाने की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा का जलस्तर कम होने के बाद घाटों की सफाई के लिए अनुकूल स्थिति बनी है। ऐसे में नगर निगम को गाद हटाने, सीढ़ियों की सफाई और फिसलन वाले स्थानों को दुरुस्त करने का काम प्राथमिकता से कराना चाहिए। पर्व-त्योहारों को देखते हुए सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाने और घाटों पर नियमित निगरानी की जरूरत भी बताई गई है।

केंद्रीय जल आयोग के अनुसार वाराणसी में गंगा का चेतावनी स्तर 70.262 मीटर, खतरे का स्तर 71.262 मीटर और अब तक का उच्चतम बाढ़ स्तर 73.901 मीटर है। जलस्तर घटने से राहत के साथ अब घाटों की सफाई और व्यवस्था को लेकर नगर निगम के सामने चुनौती है।