वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक MLC के लिए मतदान शुरू, 74,840 मतदाता 34 प्रत्याशियों की किस्मत का करेंगे फैसला, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम 

वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी के मतदान की प्रक्रिया शुक्रवार की सुबह 8 बजे शुरू हो गई। वाराणसी में स्नातक और शिक्षक एमएलसी के लिए 74,840 मतदाता 34 प्रत्याशियों की किस्तम का फैसला करेंगे। बूथों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी की निगरानी में मतदान की प्रक्रिया जारी है। सत्यापन के बाद ही मतदाताओं को मतदान केंद्रों के अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। वहीं अधिकारियों की टीम भी बूथों पर भ्रमण कर निगरानी कर रही है। 
 

वाराणसी। वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक एमएलसी के मतदान की प्रक्रिया शुक्रवार की सुबह 8 बजे शुरू हो गई। वाराणसी में स्नातक और शिक्षक एमएलसी के लिए 74,840 मतदाता 34 प्रत्याशियों की किस्तम का फैसला करेंगे। बूथों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। सीसीटीवी की निगरानी में मतदान की प्रक्रिया जारी है। सत्यापन के बाद ही मतदाताओं को मतदान केंद्रों के अंदर जाने की अनुमति दी जा रही है। वहीं अधिकारियों की टीम भी बूथों पर भ्रमण कर निगरानी कर रही है। 

स्नातक और शिक्षक एमएलसी के लिए 74,840 मतदाता 
वाराणसी खंड स्नातक और शिक्षक विधानसभा परिषद चुनाव के लिए 74,840 मतदाता बनाए गए हैं। चुनाव के लिए 21 मतदान केंद्रों पर 102 बूथ बनाए गए हैं। स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में 66,952 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में 7,888 मतदाता मताधिकार का प्रयोग करेंगे। स्नातक के 73 मूल बूथों के साथ आठ सहायक बूथ भी बनाए गए हैं। वहीं, शिक्षक के लिए 21 बूथ निर्धारित किए गए हैं। यह मतदान सुबह 8 बजे से शुरू हो चुका है और शाम 4 बजे तक मताधिकार का प्रयोग किया जा सकेगा।

मैदान में 34 प्रत्याशी 
वाराणसी खंड में स्नातक और शिक्षक दोनों सीटों के लिए कुल 34 प्रत्याशियों ने नामांकन किया था। नाम वापसी के अंतिम दिन तक किसी भी प्रत्याशी ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया। इन प्रत्याशियों की किस्मत मत पेटिका में बंद हो जाएगी। स्नातक सीट पर 24 और शिक्षक सीट पर 10 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। 

8 जिलों में कितने मतदाता
वाराणसी खंड विधान परिषद निर्वाचन क्षेत्र में वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया जिला भी शामिल है। पूरे निर्वाचन क्षेत्र में स्नातक के करीब 2.88 लाख और शिक्षक के करीब 34,900 मतदाता हैं। 8 जिलों में स्नातक के लिए 257 और शिक्षक के लिए 112 बूथ बनाए गए हैं। इन सभी जिलों को मिलाकर देखें तो करीब 3.3 लाख मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इस चुनाव में मतदाता को मत पत्र में अपनी पहली पसंद के लिए प्रत्याशी के सामने '1' लिखना पड़ता है।

27 अक्टूबर को मतगणना
चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। पहाड़िया मंडी में सुबह 8 बजे से इसकी गिनती शुरू होगी। इसी के साथ वाराणसी खंड की दोनों एमएलसी सीटों पर विजयी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की जाएगी। 

सपा के कब्जे वाली दोनों सीटों पर भाजपा की नजर
वाराणसी खंड की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की दोनों सीटों पर इस बार राजनीतिक मुकाबला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2020 के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भाजपा के सामने सपा से दोनों सीटें हासिल करने की चुनौती है, जबकि सपा अपने मौजूदा प्रतिनिधियों के सहारे जीत दोहराने की कोशिश में है। दोनों सीटों को मिलाकर कुल 34 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से 24 और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से 10 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

स्नातक सीट पर केदारनाथ सिंह और आशुतोष सिन्हा के बीच मुकाबला
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा ने अपने पुराने प्रत्याशी केदारनाथ सिंह पर दोबारा भरोसा जताया है, जबकि सपा ने मौजूदा एमएलसी आशुतोष सिन्हा को फिर से मैदान में उतारा है। वर्ष 2020 के चुनाव में आशुतोष सिन्हा ने केदारनाथ सिंह को 3,850 मतों के अंतर से हराया था। इस बार भाजपा पिछली हार के बाद सीट हासिल करने की कोशिश में है, वहीं सपा अपनी जीत बरकरार रखना चाहती है।

शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव के सामने डॉ. प्रमोद मिश्रा
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा ने मौजूदा एमएलसी लाल बिहारी यादव को दोबारा प्रत्याशी बनाया है। भाजपा ने उनके मुकाबले डॉ. प्रमोद मिश्रा को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा ने अपना आधिकारिक प्रत्याशी नहीं उतारा था और निर्दलीय चेतनारायण सिंह को समर्थन दिया था। इस बार भाजपा ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। ऐसे में शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी दोनों दलों के लिए अहम है।

शिक्षक मतदाताओं ने गिनाईं समस्याएं 
रवींद्रपुरी स्थित गोपी राधा बालिका विद्यालय में मतदान करने पहुंचे निजी विद्यालय के शिक्षक अरुण पांडे ने शिक्षकों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और समाज में उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है।

अरुण पांडे ने कहा, "मैं एक निजी विद्यालय में शिक्षक हूं। शिक्षकों को काफी तकलीफ है। इसी को ध्यान में रखकर हम मतदान करने आए हैं। शिक्षक परिवार से ज्यादा कोई परेशान नहीं है। लोग शिक्षकों को महत्व देना कम कर दिए हैं। जिस देश का शिक्षक कमजोर रहेगा, उसका विकास कैसे होगा।"

उन्होंने कहा कि शिक्षक का विकास सबसे पहले होना चाहिए, ताकि वह तनावमुक्त होकर ज्ञान का विस्तार और प्रवाह कर सके। जब शिक्षक मानसिक रूप से परेशान रहेगा, तो वह पूरी क्षमता के साथ बच्चों को शिक्षा कैसे दे पाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाएगा और शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव आएगा।

अरुण पांडे के अनुसार, शिक्षकों को बेहतर परिस्थितियां और सम्मान मिलने से वे नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा दे सकेंगे। बच्चों का भविष्य संवारने के लिए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना जरूरी है। वह इसी उम्मीद के साथ मतदान करने पहुंचे हैं कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।