ब्रिक्स की सफलता पर काशी में गूंजे वैदिक मंत्र, बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का जताया आभार

भारत की अध्यक्षता में संपन्न 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने के अवसर पर काशी में सोमवार को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हुआ। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर नमामि गंगे की ओर से सिद्धेश्वरी स्थित आध्यात्मिक परिसर में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का पूजन किया। इस दौरान सम्मेलन की सफलता के लिए आभार जताते हुए वैश्विक शांति, समृद्धि और विश्व बंधुत्व की कामना की गई।
 

नमामि गंगे के आयोजन में राष्ट्रध्वजों के साथ हुआ स्वस्तिवाचन, विश्व शांति और बंधुत्व की कामना, वसुधैव कुटुंबकम को बताया भारत की वैश्विक पहचान

वाराणसी। भारत की अध्यक्षता में संपन्न 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता और ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने के अवसर पर काशी में सोमवार को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन हुआ। गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर नमामि गंगे की ओर से सिद्धेश्वरी स्थित आध्यात्मिक परिसर में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का पूजन किया। इस दौरान सम्मेलन की सफलता के लिए आभार जताते हुए वैश्विक शांति, समृद्धि और विश्व बंधुत्व की कामना की गई।

आयोजन में ब्रिक्स देशों के राष्ट्रध्वजों के साथ संबंधित देशों के राष्ट्राध्यक्षों की तस्वीरें रखकर स्वस्तिवाचन कराया गया। वेदपाठी बटुकों ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों और गंगाष्टकम का पाठ किया। वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच भारत की प्राचीन सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा और विश्व कल्याण की भावना को प्रदर्शित किया गया।

सहयोग और संवाद को बताया विकास का आधार
नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक एवं नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के माध्यम से भारत ने दुनिया के सामने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को मजबूती से रखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक विकास में सहयोग, संवाद और साझा हितों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति की झलक देखने को मिली। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तनाव और मतभेद के बीच भारत ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से देशों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। यह वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने वाला प्रयास है।

भारत-चीन संवाद को बताया सकारात्मक
राजेश शुक्ला ने कहा कि ब्रिक्स केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं, बल्कि विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने का माध्यम भी है। भारत की अध्यक्षता में समावेशी विकास, आपसी सहयोग और साझा हितों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया गया। उन्होंने भारत-चीन संबंधों में संवाद और साझा हितों पर सहयोग को सकारात्मक संकेत बताया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता को भी महत्वपूर्ण बताया। कहा कि रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग भारत-रूस संबंधों को नई परिस्थितियों में और मजबूत करने में सहायक हो सकता है। आयोजन के माध्यम से काशी की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और भारत की वैश्विक सोच को एक साथ प्रस्तुत किया गया। राजेश शुक्ला ने कहा कि काशी सदियों से आध्यात्मिकता, शांति और सह-अस्तित्व का संदेश देती रही है। ऐसे में वैश्विक मंच पर भारत की उपलब्धि के अवसर पर बाबा विश्वनाथ और मां गंगा का आभार जताना काशी की परंपरा के अनुरूप है। भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल भाव लोककल्याण और विश्वकल्याण है, जो आज की वैश्विक चुनौतियों के बीच दुनिया को नई दिशा दे सकता है।