मन की बात में गूंजा वाराणसी का हरित अभियान : 1 घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाकर बने रिकॉर्ड को पीएम मोदी ने सराहा
वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात में वाराणसी के ऐतिहासिक वृक्षारोपण अभियान की गूंज सुनाई दी। एक घंटे में 2.51 लाख से अधिक पौधे लगाकर बनाए गए रिकॉर्ड को प्रधानमंत्री ने “जनशक्ति और पर्यावरण चेतना का अद्भुत संगम” बताया, जिससे इस पहल को राष्ट्रीय पहचान मिली है।
वाराणसी के अभियान ने बनाया विश्व रिकॉर्ड
वाराणसी में आयोजित इस विशेष वृक्षारोपण अभियान के दौरान मात्र एक घंटे में 2,51,000 से अधिक पौधे लगाए गए। यह उपलब्धि न सिर्फ प्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई। इस अभियान ने Guinness World Records में अपना नाम दर्ज कराते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया।
प्रधानमंत्री ने की जमकर सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में इस पहल की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह अभियान जनभागीदारी की शक्ति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने इसे एक प्रेरणादायक मॉडल बताते हुए अन्य राज्यों और नागरिकों से भी ऐसे प्रयासों को अपनाने का आह्वान किया।
जनभागीदारी बनी सफलता की कुंजी
इस अभियान की सबसे बड़ी खासियत इसमें आम लोगों की भागीदारी रही। विद्यार्थियों, युवाओं, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न संस्थानों ने मिलकर इसे एक जनआंदोलन का रूप दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने एक साथ आकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, जो सामूहिक प्रयासों की ताकत को दर्शाता है।
‘एक पेड़ मां के नाम’ से भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह पहल सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को भावनात्मक रूप से भी प्रकृति से जोड़ती है। इससे समाज में हरियाली के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता दोनों बढ़ती हैं।
मेरठ के सौर ऊर्जा मॉडल का भी जिक्र
वाराणसी के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौर ऊर्जा के सफल मॉडल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में इस तरह की पहल देश को आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।
पर्यावरण संरक्षण को मिली नई दिशा
वाराणसी का यह अभियान न केवल एक रिकॉर्ड बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में नई प्रेरणा भी देता है। इस तरह के प्रयास आने वाले समय में देशभर में हरित क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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