वाराणसी : कांवड़ मार्ग पर कट प्वाइंट से नहीं रुक रही वाहनों की आवाजाही, हादसों की आशंका
वाराणसी। सावन माह में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। प्रयागराज से वाराणसी आने वाले दक्षिणी मार्ग को कांवड़ियों के लिए आरक्षित घोषित किया गया है, जहां आम वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। पुलिस कमिश्नर, डीआईजी समेत वरिष्ठ अधिकारी लगातार कांवड़ मार्ग का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं और ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं। हालांकि, पुलिस की सख्ती के बीच मार्ग के कट प्वाइंटों पर सामने आ रही अव्यवस्था नई चुनौती बनकर उभर रही है, जहां वाहन चालकों की जल्दबाजी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
कछवां, मिर्जामुराद और रखौना गांव के आसपास आरक्षित कांवड़ मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिसकर्मी लगातार मार्ग पर गश्त कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसी भी प्रकार का सामान्य यातायात कांवड़ियों के लिए आरक्षित लेन में प्रवेश न करे। दोपहिया वाहनों सहित अन्य छोटे वाहनों को मार्ग के शुरुआती हिस्सों में ही रोककर उन्हें वैकल्पिक रास्तों से जाने के लिए निर्देशित किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य कांवड़ियों की यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और बाधारहित बनाए रखना है।
मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के बंगला गांव के पास पुलिस विशेष रूप से सक्रिय दिखाई दी। यहां थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ आरक्षित मार्ग पर आने वाले दोपहिया वाहनों को रोककर वापस भेज रहे थे। वाहन चालकों को समझाया जा रहा था कि वे निर्धारित वैकल्पिक मार्ग का ही उपयोग करें, जिससे कांवड़ियों के आवागमन में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। पुलिस की इस कार्रवाई से आरक्षित मार्ग पर सामान्य वाहनों का दबाव काफी हद तक नियंत्रित होता दिखाई दिया।
हालांकि, इसी व्यवस्था के दौरान एक गंभीर समस्या भी सामने आई। जब वाहन चालकों को आरक्षित मार्ग से लौटाया गया, तो उनमें से कई लोग निकट स्थित कट प्वाइंट से सड़क पार कर दूसरी लेन में जाने लगे। इस दौरान कई चालक बिना दोनों ओर से आ रहे तेज रफ्तार वाहनों का सही आकलन किए ही सड़क पार करने का प्रयास करते नजर आए। दूसरी लेन पर लगातार वाहनों की आवाजाही बनी रहने के कारण यह स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण दिखाई दी। थोड़ी सी असावधानी किसी गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण बन सकती है।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार कुछ वाहन चालक वैकल्पिक मार्ग तक पहुंचने की जल्दबाजी में यातायात नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई लोग बिना संकेत दिए अचानक कट से दूसरी ओर मुड़ जाते हैं, जबकि दूसरी दिशा से आ रहे वाहन तेज गति में होते हैं। ऐसी स्थिति में पीछे चल रहे वाहन भी अचानक ब्रेक लगाने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे टक्कर की आशंका बढ़ जाती है। सावन के दौरान श्रद्धालुओं और वाहनों की बढ़ी हुई संख्या इस खतरे को और गंभीर बना रही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस की तैनाती आरक्षित मार्ग पर तो प्रभावी है, लेकिन कट प्वाइंटों पर यातायात नियंत्रण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं दिखाई देती। यदि इन स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी या यातायात पुलिस की तैनाती की जाए और वाहनों को नियंत्रित ढंग से दूसरी लेन में भेजा जाए, तो दुर्घटनाओं की संभावना काफी कम हो सकती है। इसके अलावा बैरिकेडिंग, दिशा-सूचक संकेतक और गति नियंत्रण के उपाय भी स्थिति को सुरक्षित बनाने में सहायक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल वाहनों को रोक देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तक पहुंचाने की व्यवस्था भी उतनी ही आवश्यक है। कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस की प्राथमिकता श्रद्धालुओं की सुरक्षा है, लेकिन आम वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है। फिलहाल पुलिस पूरी मुस्तैदी के साथ कांवड़ मार्ग पर ड्यूटी निभा रही है, लेकिन कट प्वाइंटों पर उत्पन्न हो रही स्थिति प्रशासन के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यदि समय रहते इन स्थानों पर प्रभावी यातायात प्रबंधन नहीं किया गया और वाहन चालक जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी करते रहे, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में आवश्यक है कि पुलिस आरक्षित मार्ग के साथ-साथ कट वाले संवेदनशील स्थानों पर भी विशेष निगरानी और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि कांवड़ियों के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी बनी रहे।