मिड डे मील के साथ बच्चों को मिलेगा सूजी का हलवा और नमकीन उपमा, वाराणसी के परिषदीय विद्यालयों में शुरू होगी सप्लीमेंट्री न्यूट्रीशन योजना

जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) के साथ अतिरिक्त पोषण भी मिलेगा। बच्चों के खानपान में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालयों में सप्लीमेंट्री न्यूट्रीशन योजना लागू की जा रही है। इसके तहत विद्यार्थियों को अलग-अलग दिनों में सूजी का मीठा हलवा और नमकीन उपमा परोसा जाएगा। इस पहल से जिले के करीब 1.85 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे।
 

जिले के 1.85 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ, पहले और तीसरे सप्ताह में मीठा हलवा, दूसरे, चौथे और पांचवें सप्ताह में परोसा जाएगा उपमा

वाराणसी। जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अब मध्याह्न भोजन (मिड डे मील) के साथ अतिरिक्त पोषण भी मिलेगा। बच्चों के खानपान में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने के उद्देश्य से विद्यालयों में सप्लीमेंट्री न्यूट्रीशन योजना लागू की जा रही है। इसके तहत विद्यार्थियों को अलग-अलग दिनों में सूजी का मीठा हलवा और नमकीन उपमा परोसा जाएगा। इस पहल से जिले के करीब 1.85 लाख बच्चे लाभान्वित होंगे।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि निर्धारित मेन्यू के अनुसार महीने के पहले और तीसरे सप्ताह में बच्चों को सूजी का मीठा हलवा दिया जाएगा, जबकि दूसरे, चौथे और पांचवें सप्ताह में नमकीन उपमा परोसा जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम 30 ग्राम सूजी से तैयार पौष्टिक व्यंजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसका वितरण विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों की जिम्मेदारी होगी।

हलवा तैयार करने के लिए प्रति छात्र 30 ग्राम सूजी, पांच ग्राम तेल, 22 ग्राम चीनी और पांच ग्राम घिसा हुआ नारियल इस्तेमाल किया जाएगा। वहीं, नमकीन उपमा में 30 ग्राम सूजी के साथ दो ग्राम तेल, 20 ग्राम मौसमी सब्जियां, छह ग्राम मूंगफली, नमक और आवश्यक मसालों का उपयोग होगा। दोनों व्यंजन निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किए जाएंगे।

वितरण और गुणवत्ता की होगी निगरानी
बीएसए ने बताया कि योजना में पारदर्शिता और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। विद्यालयों में लाभार्थी विद्यार्थियों का तिथिवार विवरण, स्टॉक पंजिका, सामग्री खरीद के बिल और वितरण के फोटोग्राफ सुरक्षित रखे जाएंगे। 

जिलाधिकारी, ब्लॉक स्तरीय टास्क फोर्स और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से योजना की नियमित निगरानी की जाएगी। निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, सामग्री की उपलब्धता और बच्चों तक निर्धारित व्यंजन पहुंचने की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। इससे मिड डे मील के साथ बच्चों को अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जा सकेगा।