वाराणसी : डीआईजी कार्यालय की सरकारी जमीन हड़पने की कोशिश, छह पर मुकदमा 

पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कार्यालय एवं सरकारी आवास की भूमि के स्वामित्व को फर्जी तरीके से अपने नाम कराने और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी नाम पर दर्ज कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। प्रकरण में क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर कैंट थाने में छह लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
 

वाराणसी। पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) कार्यालय एवं सरकारी आवास की भूमि के स्वामित्व को फर्जी तरीके से अपने नाम कराने और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी नाम पर दर्ज कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। प्रकरण में क्षेत्रीय लेखपाल की तहरीर पर कैंट थाने में छह लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

पुलिस के अनुसार, आराजी संख्या 93, अस्सी प्रतिशत डीआईजी कॉलोनी स्थित भवन संख्या एस-8/108 ए-3 (आसपास) पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय और सरकारी आवास के लिए वर्ष 1971 से अधिग्रहित भूमि है। आरोप है कि सबसे पहले स्वर्गीय आनंद अग्रवाल ने नगर निगम को गुमराह कर संपत्ति का नामांतरण अपने नाम करा लिया। इसके बाद गुंजन अग्रवाल ने वर्ष 2018 में कथित अपंजीकृत वसीयत के आधार पर खुद को उत्तराधिकारी बताते हुए न्यायालय में वाद दायर किया गया।

जांच में सामने आया कि राज्य सरकार की ओर से आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद न्यायालय ने 18 सितंबर 2022 को वाद निरस्त करते हुए खारिज कर दिया था। इसके बावजूद आरोपियों ने फर्जी वसीयत और अन्य दस्तावेजों के जरिए सरकारी संपत्ति पर अधिकार जताने और नामांतरण कराने का प्रयास किया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय लेखपाल की शिकायत पर कैंट थाना पुलिस ने स्मृता अग्रवाल, इला अग्रवाल, बृजेश अग्रवाल, शरद अग्रवाल, मयंक अग्रवाल के खिलाफ सरकारी अभिलेखों में हेरफेर, कूटरचना, धोखाधड़ी और सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे के प्रयास सहित संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।