वाराणसी : आरक्षण और यूजीसी नियमों के विरोध में कचहरी पर केसरिया भारत का प्रदर्शन, सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, सीएम को संबोधित ज्ञापन सौंपा 

जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में गुरुवार को केसरिया भारत के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने वाराणसी कचहरी परिसर के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए आरक्षण व्यवस्था में बदलाव, एससी-एसटी एक्ट की समीक्षा और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने समेत विभिन्न मांगें उठाईं। धरने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
 

वाराणसी। जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में गुरुवार को केसरिया भारत के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने वाराणसी कचहरी परिसर के सामने धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए आरक्षण व्यवस्था में बदलाव, एससी-एसटी एक्ट की समीक्षा और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने समेत विभिन्न मांगें उठाईं। धरने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम सिटी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान केसरिया भारत के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल, 2026 को वापस लेना, एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों की समीक्षा करना तथा आरक्षण व्यवस्था में सुधार कर आर्थिक आधार को प्राथमिकता देना शामिल है। आरक्षण व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से लागू व्यवस्था का लाभ समाज के सभी जरूरतमंद और वंचित लोगों तक समान रूप से नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने कहा कि एससी-एसटी और ओबीसी वर्ग में बड़ी संख्या में जातियां शामिल हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ कुछ ही समुदायों तक सीमित रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा कर वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को प्राथमिकता दी जाए।

प्रदर्शनकारियों ने वाल्मीकि, मुसहर, सहरिया, नट और ढोली समेत अन्य वंचित समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर व्यापक समीक्षा आवश्यक है, ताकि इसका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। यूजीसी के नए नियमों को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने विरोध जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल, 2026 के प्रावधान एकतरफा हैं और इससे उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों एवं शिक्षकों के बीच असमानता तथा अविश्वास की स्थिति पैदा हो सकती है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने समता समिति के गठन और उसकी संरचना पर भी सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच के लिए सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने झूठी शिकायतों के मामलों में कार्रवाई का प्रावधान किए जाने की मांग की। धरने के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आगामी चुनाव में NOTA का विकल्प चुनकर विरोध दर्ज कराया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को आगे और व्यापक किया जाएगा। धरना समाप्त होने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से एडीएम सिटी को सौंपा। ज्ञापन में आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने और यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन बिल, 2026 को वापस लेने की मांग प्रमुख रूप से शामिल रही।