वाराणसी : राणी सती दादी के सिंधारा महोत्सव में उमड़ी श्रद्धा, भजन और मंगल गीतों से गूंजा त्रिदेव मंदिर

नारायणी शरणम के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय त्रिदेव मंदिर में श्री राणी सती दादी जी का सिंधारा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और महिलाओं ने सहभागिता की। पूरे मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।
 

वाराणसी। नारायणी शरणम के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय त्रिदेव मंदिर में श्री राणी सती दादी जी का सिंधारा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और महिलाओं ने सहभागिता की। पूरे मंदिर परिसर में दिनभर भक्ति और उत्सव का माहौल बना रहा।

महोत्सव की शुरुआत मंगल पाठ और श्री राणी सती दादी जी के विशेष श्रृंगार से हुई। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से दादी जी की पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने दादी जी को सिंधारे के रूप में सुहाग सामग्री, मेहंदी और विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान अर्पित किए। इस दौरान महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना के लिए दादी जी का आशीर्वाद लिया।

कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों, मंगल गीतों और दादी जी के जयकारों से गूंजता रहा। प्रीति, विक्की, आशा, गालामा, सुधा अग्रवाल, सपना, नैना, उर्वा और नीलम सहित अन्य श्रद्धालुओं ने भजन एवं मंगल गीत प्रस्तुत किए। भजनों की धुन पर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए और पूरे उत्साह के साथ दादी जी के जयकारे लगाए।

सिंधारा महोत्सव के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। एक-दूसरे को सुहाग सामग्री भेंट करने के साथ मेहंदी लगाकर उत्सव की परंपरा निभाई गई। आयोजकों ने बताया कि सिंधारा महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिलाओं की सांस्कृतिक परंपराओं से भी जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इसके माध्यम से श्रद्धालु राणी सती दादी जी की आराधना के साथ पारंपरिक संस्कारों और लोक संस्कृति को आगे बढ़ाने का संदेश देते हैं।

आयोजन के समापन पर भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति, पारस्परिक प्रेम और सौहार्द की भावना दिखाई दी। आयोजकों ने महोत्सव को सफल बनाने में सहयोग करने वाले नारायणी शरणम् के सदस्यों, महिलाओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया।