वाराणसी : घमहापुर में हत्या के विरोध में उबाल, शव रखकर दो घंटे चक्का जाम, पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी

घमहापुर गांव में रविवार की रात हुई युवक की हत्या के बाद सोमवार को माहौल पूरी तरह गरमा गया। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मृतक मनीष सिंह का शव गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग शव को लेकर कुंवार बाजार पहुंचे और सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। डीसीपी नीतू कात्यायन समेत पुलिस अफसर मौके पर पहुंची। पुलिस लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद मार्ग पर आवागमन सुचारू हो सका। 
 

वाराणसी। घमहापुर गांव में रविवार की रात हुई युवक की हत्या के बाद सोमवार को माहौल पूरी तरह गरमा गया। पोस्टमार्टम के बाद जैसे ही मृतक मनीष सिंह का शव गांव पहुंचा, परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग शव को लेकर कुंवार बाजार पहुंचे और सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। डीसीपी नीतू कात्यायन समेत पुलिस अफसर मौके पर पहुंची। पुलिस लोगों को समझाकर शांत कराया। इसके बाद मार्ग पर आवागमन सुचारू हो सका। 

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि समय रहते कार्रवाई होती तो घटना को रोका जा सकता था। ग्रामीणों की मांग थी कि सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। मौके पर तनाव की स्थिति को देखते हुए कई थानों की पुलिस और पीएसी बल तैनात किया गया। रविवार की रात मनीष सिंह अपनी फैक्ट्री से घर लौट रहे थे, तभी गांव के पास एक महिला से उनकी कार का एक्सीडेंट हो गया, जिसमें महिला घायल हो गई। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और गांव के कुछ लोगों ने उन्हें कार से बाहर खींचकर बेरहमी से पीट दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

 

मामले में मृतक के परिजनों की तहरीर पर 8 नामजद और 7 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब तक दो आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। मृतक मनीष सिंह अपने परिवार के इकलौते सहारा थे। उनके परिवार में पत्नी, दो बेटियां और एक छह वर्षीय बेटा है। उनके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। परिवार का भरण-पोषण वे दोना-पत्तल बनाने के कारखाने से करते थे।

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