वाराणसी : ट्रांसजेंडर संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन पुलिस ने रोका, आक्रोश
वाराणसी। बीएचयू के लंका गेट पर रविवार को ट्रांसजेंडर संशोधन कानून के विरोध में आयोजित विरोध प्रदर्शन को पुलिस ने रोक दिया। इससे छात्रों में आक्रोश देखने को मिला। यह प्रदर्शन क्वीर समुदाय और विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा केंद्र सरकार के ‘ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2026’ के विरोध में आयोजित किया जाना था।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने मौके पर पहुंचकर न केवल उन्हें एकत्र होने से रोका, बल्कि उनके प्लेकार्ड भी जब्त कर लिए और कुछ ट्रांसजेंडर प्रतिभागियों के साथ दुर्व्यवहार किया। पुलिस की ओर से बताया गया कि लंका गेट क्षेत्र में प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी, इसलिए कार्रवाई की गई। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह उनके शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन है, जो अनुच्छेद 19(1)(b) के तहत संरक्षित है।
विरोध कर रहे संगठनों और छात्रों ने इस संशोधन कानून को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं। उनका कहना है कि यह कानून 2014 में NALSA बनाम भारत संघ के ऐतिहासिक फैसले की मूल भावना के विपरीत है, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को ‘स्व-पहचान’ (Self Identification) का अधिकार दिया गया था। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, नए संशोधन में ट्रांसजेंडर पहचान को प्रमाणित करने के लिए मेडिकल बोर्ड और प्रशासनिक प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया गया है, जो न केवल अपमानजनक है, बल्कि निजता के अधिकार का भी हनन करता है।
इस प्रदर्शन में All India Students Association, National Students Union of India, बनारस क्वीयर प्राइड संगठन, All India Progressive Women’s Association, फेमिनिस्ट कलेक्टिव तथा बीएसएम सहित कई छात्र एवं सामाजिक संगठन शामिल होने वाले थे। इन संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार बिना व्यापक चर्चा के इस कानून को लागू कर रही है और विशेषज्ञों व सुप्रीम कोर्ट से जुड़े विचारों को नजरअंदाज किया गया है।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे आने वाले समय में इस कानून के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उन्होंने सरकार के सामने अपनी प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें संशोधन अधिनियम 2026 को वापस लेना, बिना मेडिकल हस्तक्षेप के स्व-पहचान के अधिकार को बहाल करना, निजता का उल्लंघन करने वाले प्रावधानों को समाप्त करना, शिक्षा एवं रोजगार में ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए क्षैतिज आरक्षण लागू करना तथा पूर्व के कानूनों और न्यायालय के आदेशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करना शामिल है। घटना के बाद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण बताई जा रही है, लेकिन इस मुद्दे को लेकर छात्रों और सामाजिक संगठनों में आक्रोश बना हुआ है।