वाराणसी : निजी स्कूलों की मनमानी पर अभिभावकों का गुस्सा, डीएम से शिकायत कर दी आंदोलन की चेतावनी
वाराणसी। शहर में निजी विद्यालयों द्वारा फीस, ड्रेस और स्टेशनरी के नाम पर की जा रही कथित मनमानी वसूली के खिलाफ अभिभावकों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में काशी अभिभावक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिला और विस्तृत शिकायत पत्र सौंपते हुए जल्द कार्रवाई की मांग की। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अभिभावक सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे अधिवक्ता डॉ. शम्मी कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि प्रदेश सरकार द्वारा लागू “यूपी स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अध्यादेश-2018” का अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। इस कानून के तहत प्रत्येक स्कूल को निर्धारित शुल्क संरचना को सार्वजनिक करना और उसी के अनुसार फीस लेना अनिवार्य है, लेकिन कई संस्थान मनमाने तरीके से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रिएडमिशन फीस पर प्रतिबंध होने के बावजूद कई विद्यालय पुनः प्रवेश के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर महंगी ड्रेस और निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव बनाया जाता है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
अधिवक्ता राजन पांडेय ने कहा कि एनसीईआरटी की सस्ती और मानक पुस्तकों की बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोप दी जाती हैं। साथ ही स्टेशनरी, यूनिफॉर्म, एजुकेशनल टूर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के नाम पर हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जा रहे हैं। अभिषेक गोलू श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूल बिना मान्यता के ही बड़े-बड़े बोर्डों के नाम पर संचालित हो रहे हैं, जो गंभीर अनियमितता है।
अधिवक्ता आयुषचंद्र राजपूत ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को मुफ्त प्रवेश देने का प्रावधान है, लेकिन कई स्कूल इसका भी उल्लंघन कर रहे हैं और इन बच्चों से भी शुल्क लिया जा रहा है। इन सभी शिकायतों को सुनने के बाद जिलाधिकारी वाराणसी ने आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सभी निजी विद्यालयों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिएडमिशन फीस, ड्रेस और किताबों के नाम पर अनावश्यक वसूली पर रोक लगाई जाएगी।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यदि कोई विद्यालय नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ आर्थिक दंड के साथ-साथ मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे ऐसे स्कूलों की सूची उपलब्ध कराएं जो बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं, ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में अधिवक्ता राजेश राजपूत, अंकुर सिंह, अंकित पांडेय, ठाकुर कुश प्रताप, जितेंद्र सिंह, रोहित पांडेय, अंकित सेठ, राहुल, देवेंद्र पांडेय और राहुल नागवानी समेत कई अभिभावक मौजूद रहे।