वाराणसी : रक्षाबंधन पर काशी की महिलाओं के हुनर से सजेगी भाइयों की कलाई
स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने तैयार कीं करीब दो लाख हस्तनिर्मित राखियां, 50 से 1000 रुपये तक की आकर्षक वैराइटी बाजार में उपलब्ध
करीब दो लाख हस्तनिर्मित राखियां तैयार करने में जुटीं स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं
रुद्राक्ष, मोती, कलावा, कौड़ियां और गोटा-पत्ती से सज रहीं आकर्षक राखियां
50 से 1000 रुपये तक की वैराइटी, स्थानीय बाजारों में बढ़ी मांग
हस्तनिर्मित राखियों से महिलाओं को घर बैठे रोजगार और अतिरिक्त आमदनी
रिपोर्ट- ओमकार नाथ
वाराणसी। रक्षाबंधन पर्व को लेकर काशी के बाजार पूरी तरह रंग-बिरंगी राखियों से सजने लगे हैं। इस बार रक्षाबंधन पर वाराणसी के करीब दो लाख भाइयों की कलाइयों पर स्थानीय महिलाओं के हाथों से बनी हस्तनिर्मित राखियां सजने की उम्मीद है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और विभिन्न स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं दिन-रात आकर्षक राखियां तैयार करने में जुटी हैं। इन राखियों की खासियत यह है कि इनमें पारंपरिक कला के साथ स्थानीय महिलाओं की मेहनत और रचनात्मकता भी झलकती है।
ग्रामीण महिलाओं ने संभाला राखी बनाने का जिम्मा
हरहुआ क्षेत्र में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी करीब 12 महिलाएं राखियां तैयार करने में लगी हैं। समूह की लीडर रंजना सिंह के मुताबिक, साधारण राखी तैयार करने में करीब 20 रुपये की लागत आती है। इसे बाजार में 30 से 35 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इसके अलावा डिजाइन और सामग्री के हिसाब से राखियों की कीमत बढ़ जाती है।
समूह से जुड़ी उषा सिंह, मंजूरी देवी, तनु राय और रानी सिंह का कहना है कि इस बार ग्राहकों की पसंद को देखते हुए राखियों की कई वैराइटी तैयार की जा रही हैं। इनकी कीमत 50 रुपये से शुरू होकर 1000 रुपये तक है। रुद्राक्ष और मोती वाली राखियों के साथ ही फैंसी डिजाइन और आकर्षक पैटर्न वाली राखियां भी तैयार की जा रही हैं।
50 रुपये से शुरू फैंसी राखियां
रक्षाबंधन से पहले शहर के प्रमुख बाजारों में राखियों की खरीदारी के लिए ग्राहकों की आवाजाही बढ़ने लगी है। काशीपुरा, कर्णघंटा, हड़हासराय, चौक, गोदौलिया, बेनिया और रथयात्रा समेत कई बाजारों में थोक और फुटकर दुकानों पर राखियों की अलग-अलग वैराइटी उपलब्ध हैं।
गुरुबाग की कारोबारी खुशबू सोनेजा के अनुसार, साधारण और धागा पैटर्न वाली राखियां 50 से 150 रुपये तक में उपलब्ध हैं। मोती, कलावा और इंब्रॉयडरी वाली राखियों की कीमत 200 से 500 रुपये तक है। वहीं, प्रीमियम और फैंसी हैंडमेड डिजाइन वाली राखियां 500 से 1000 रुपये तक में बिक रही हैं।
एक दिन में बन रहीं 100 राखियां
ककरमत्ता की स्नेहा और जैतपुरा की शेफाली ने बताया कि राखियों को आकर्षक बनाने के लिए मोती, कौड़ियां, गोटा-पत्ती और अन्य सजावटी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। डिजाइन के आधार पर एक राखी तैयार करने में अलग-अलग समय लगता है। मेहनत करने वाली महिलाएं एक दिन में करीब 100 राखियां तक तैयार कर रही हैं।
महिलाओं का कहना है कि बाजार में मशीन से बनी राखियों के बीच हाथ से तैयार राखियों की अपनी अलग पहचान है। ग्राहक इन राखियों को इसलिए भी पसंद कर रहे हैं क्योंकि इनमें स्थानीय कला और महिलाओं की मेहनत जुड़ी है।
हस्तनिर्मित राखियों से बढ़ रहा महिलाओं का रोजगार
रक्षाबंधन जैसे त्योहार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए कमाई का बड़ा अवसर लेकर आते हैं। घर के कामकाज के साथ महिलाएं राखियां तैयार कर रही हैं और इन्हें स्थानीय बाजारों में बेचकर आमदनी अर्जित कर रही हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।
महिलाओं का कहना है कि यदि हस्तनिर्मित राखियों की मांग इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाली राखियों की बिक्री से समूह की महिलाओं को सीधे लाभ मिलता है और उनके पारंपरिक हुनर को भी बाजार मिल रहा है।
काशी के बाजारों में बढ़ी रौनक
रक्षाबंधन नजदीक आने के साथ ही काशी के प्रमुख बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सजने लगे हैं। दुकानों पर बच्चों से लेकर युवाओं और महिलाओं के लिए अलग-अलग डिजाइन की राखियां उपलब्ध हैं। कहीं रुद्राक्ष और मोती वाली राखियां आकर्षण का केंद्र हैं तो कहीं फैंसी और इंब्रॉयडरी डिजाइन ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं।
दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब केवल सस्ती राखी ही नहीं, बल्कि डिजाइन, गुणवत्ता और हस्तनिर्मित होने को भी महत्व दे रहे हैं। यही वजह है कि इस बार हैंडमेड राखियों की मांग में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।