वाराणसी : गंगा तट के प्राचीन शिवालयों के संरक्षण की मांग, नमामि गंगे प्रतिनिधिमंडल ने आयुष मंत्री को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी। गंगा तट पर स्थित प्राचीन शिवालयों के संरक्षण, नियमित पूजा-अर्चना और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर गुरुवार को नमामि गंगे गंगा विचार मंच, जिला इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा 'दयालु' से उनके महमूरगंज स्थित आवास पर मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने गंगातटीय ऐतिहासिक मंदिरों की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए उनके संरक्षण और नियमित देखरेख के लिए ज्ञापन सौंपा।
जिला संयोजक शिवम अग्रहरि के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि नमामि गंगे गंगा विचार मंच पिछले कई वर्षों से गंगा घाटों पर स्थित शिवालयों में स्वच्छता अभियान चला रहा है। इसके बावजूद अनेक प्राचीन मंदिर और शिवलिंग आज भी उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि कई स्थानों पर शिवलिंग क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और मंदिरों में नियमित पूजा-पाठ तथा रखरखाव की समुचित व्यवस्था नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से प्रह्लाद घाट, त्रिलोचन घाट, गायघाट, पंचगंगा घाट और केदार घाट सहित अन्य घाटों की मढ़ियों और सीढ़ियों पर स्थापित प्राचीन शिवलिंगों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उनका कहना था कि ये शिवालय धार्मिक आस्था के साथ-साथ काशी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने मांग की कि बाबा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर इन प्रमुख शिवालयों में भी नियमित पूजा-अर्चना, सफाई और रखरखाव की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बैठक के दौरान काशी के धार्मिक इतिहास के जानकार चंद्रशेखर द्रविड़ ने भी गंगातटीय मंदिरों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि काशी के छोटे-बड़े सभी मंदिरों का अपना विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। उन्होंने समाज में इन मंदिरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जनसहभागिता के माध्यम से इनके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
आयुष मंत्री डॉ. दयाशंकर मिश्रा 'दयालु' ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए गंगातटीय शिवालयों के संरक्षण, स्वच्छता और नियमित पूजा व्यवस्था को लेकर आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर गंगा सेविका किरण पांडेय, चारुशिला सिन्हा, पार्षद संजय विशम्भरी, राजेश वर्मा, शंभू साहनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।