वाराणसी: 10 साल में ही जर्जर हुई लोहराडीह की सड़क, 10 फीट के रास्ते से चार पहिया वाहन निकलना मुश्किल

सेवापुरी ब्लॉक के लोहराडीह गांव को कपसेठी-कछवां मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क करीब दस वर्ष में ही बदहाल हो गई है। करीब 10 फीट चौड़ी इस सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कई स्थानों पर किनारे कटकर धंस गए हैं। हालत यह है कि अब इस मार्ग से चार पहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
 

वाराणसी। सेवापुरी ब्लॉक के लोहराडीह गांव को कपसेठी-कछवां मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली सड़क करीब दस वर्ष में ही बदहाल हो गई है। करीब 10 फीट चौड़ी इस सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं और कई स्थानों पर किनारे कटकर धंस गए हैं। हालत यह है कि अब इस मार्ग से चार पहिया वाहन निकालना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की मरम्मत के लिए कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क के दोनों किनारों पर पक्की पटरी और पर्याप्त किनारा संरक्षण नहीं होने से बारिश का पानी सड़क के नीचे की मिट्टी को लगातार काटता रहा। इससे सड़क के किनारे कमजोर होते गए और कई जगह सड़क धंसकर टूट गई। वर्तमान में कई स्थानों पर सड़क का किनारा पूरी तरह कट चुका है, जिससे आवागमन के दौरान हादसे का खतरा बना हुआ है।

इस मार्ग से लोहराडीह की करीब एक हजार आबादी का प्रतिदिन आवागमन होता है। ग्रामीण कपसेठी और कछवां सहित आसपास के बाजारों और अन्य स्थानों पर जाने के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। सड़क की खराब हालत का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गड्ढों से बचने के प्रयास में कई लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। रात में बिना पर्याप्त रोशनी के समस्या और गंभीर हो जाती है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की बदहाली को लेकर ऑनलाइन शिकायतें भी दर्ज कराई गईं, लेकिन मौके पर समस्या का समाधान किए बिना ही शिकायत का ऑनलाइन निस्तारण कर दिया गया। शिकायत निस्तारण का संदेश मिलने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर स्थलीय निरीक्षण किया जाता तो सड़क की वास्तविक स्थिति सामने आती और मरम्मत की जरूरत स्पष्ट होती।

ग्रामीणों के मुताबिक, जर्जर सड़क का असर आपातकालीन सेवाओं पर भी पड़ सकता है। मरीज, गर्भवती महिला या गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के दौरान खराब सड़क के कारण वाहन की गति प्रभावित होती है। ग्रामीणों का दावा है कि आपात स्थिति में गांव से मुख्य मार्ग तक पहुंचने में 20 से 25 मिनट तक लग सकते हैं।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही सड़क की तत्काल मरम्मत, दोनों किनारों को मजबूत करने और जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की गई है। उनका कहना है कि केवल ऑनलाइन शिकायत निस्तारण के बजाय मौके पर जांच कर स्थायी समाधान कराया जाए, ताकि बारिश में सड़क दोबारा क्षतिग्रस्त न हो।