वाराणसी : अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्रों की जांच की मांग, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने राज्यपाल को संबोधित पत्रक सौंपकर लगाई गुहार 

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्रों में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज बुलंद करते हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपकर प्रमाणपत्रों की जांच कराने की मांग की। संगठन का आरोप है कि प्रदेश के कई जिलों में सामान्य वर्ग के कुछ लोग अवैध तरीके से अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे वास्तविक आदिवासी समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
 

वाराणसी। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्रों में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज बुलंद करते हुए राज्यपाल, मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को सौंपकर प्रमाणपत्रों की जांच कराने की मांग की। संगठन का आरोप है कि प्रदेश के कई जिलों में सामान्य वर्ग के कुछ लोग अवैध तरीके से अनुसूचित जनजाति के प्रमाण-पत्र बनवाकर सरकारी नौकरियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं, जिससे वास्तविक आदिवासी समाज के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि वाराणसी समेत महाराजगंज, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर और मऊ जिलों में इस तरह के मामले सामने आए हैं। संगठन के अनुसार सामान्य वर्ग से जुड़े कुछ नायक, ओझा और थारू समुदाय के लोगों द्वारा कथित रूप से अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र बनवाए गए हैं। इससे वास्तविक आदिवासी समाज को मिलने वाली सुविधाओं और आरक्षण के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का कहना है कि आदिवासी गोंड समाज की उपजाति नायक और ओझा मुख्य रूप से सोनभद्र के पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करती है। उनकी सामाजिक परंपराएं, संस्कृति, रीति-रिवाज और जीवन शैली अन्य समुदायों से अलग है। ऐसे में बिना पर्याप्त जांच के जारी किए जा रहे प्रमाण-पत्र भविष्य में सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकते हैं।

संगठन ने मांग की है कि अनुसूचित जनजाति प्रमाण-पत्र जारी करने में भारत सरकार के राजपत्र संविधान आदेश संशोधन अधिनियम-2002 तथा उत्तर प्रदेश शासनादेश संख्या 129/2021/3206/26-03-2021 का सख्ती से पालन कराया जाए। साथ ही जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी कर कथित रूप से गलत प्रमाण-पत्र जारी किए हैं, उनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।

मांग पत्र में संबंधित जिलों में जारी जाति प्रमाण-पत्रों की व्यापक जांच कराने की भी मांग उठाई गई है। संगठन ने कहा कि जांच के दौरान संबंधित लोगों की सामाजिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और रोटी-बेटी संबंधों की भी पड़ताल की जानी चाहिए, ताकि वास्तविक पात्रों को ही सरकारी लाभ मिल सके। इस दौरान गोंडवाना समाज के प्रदेश अध्यक्ष सुक्कू सिंह मरावी समेत अन्य मौजूद रहे।