वाराणसी : गंगा के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी, घाटों पर सतर्कता, सैलानियों से सावधानी बरतने की अपील 

पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में रविवार को मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 60.77 मीटर रिकॉर्ड किया गया। पिछले 15 घंटे में जलस्तर में लगभग 10 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है, लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है।
 

वाराणसी। पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते गंगा के जलस्तर में रविवार को मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार सुबह गंगा का जलस्तर 60.77 मीटर रिकॉर्ड किया गया। पिछले 15 घंटे में जलस्तर में लगभग 10 सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है। हालांकि गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है, लेकिन प्रशासन ने एहतियात के तौर पर घाटों पर निगरानी बढ़ा दी है।

जलस्तर बढ़ने का असर शहर के प्रमुख घाटों पर दिखाई देने लगा है। दशाश्वमेध घाट की निचली सीढ़ियों तक गंगा का पानी पहुंच गया है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान, पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान ऊपरी सीढ़ियों पर करने पड़ रहे हैं। हालांकि गंगा आरती का आयोजन फिलहाल निर्धारित स्थान पर ही हो रहा है, लेकिन यदि आने वाले दिनों में जलस्तर में लगातार वृद्धि होती है तो आरती स्थल में आवश्यक बदलाव किया जा सकता है।

दशाश्वमेध और अस्सी घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन ने घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी है। जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें संवेदनशील घाटों पर लगातार गश्त कर रही हैं तथा लोगों से नदी के तेज बहाव और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी बरतने की अपील कर रही हैं। गंगा के बढ़ते बहाव का असर नौका संचालन पर भी आंशिक रूप से देखा जा रहा है। नाविकों को सुरक्षित स्थानों पर नावें बांधने और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि केंद्रीय जल आयोग से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर गंगा के जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। श्रावण मास में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए लोगों से अपील की गई है कि वे घाटों पर अनावश्यक जोखिम न उठाएं और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। फिलहाल स्थिति पूरी तरह सामान्य है और गंगा चेतावनी अथवा खतरे के बिंदु से काफी नीचे बह रही हैं। ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन एहतियात जरूरी है।