वाराणसी : योजनाओं का लाभ अंतिम पात्र व्यक्ति तक पहुंचाएं, डीएम ने गांव-गांव शिविर लगाने के दिए निर्देश
वाराणसी। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ किसी भी पात्र व्यक्ति से छूटना नहीं चाहिए। इसके लिए ग्राम और ब्लॉक स्तर पर नियमित कैंप एवं शिविर आयोजित कर पात्र लाभार्थियों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें सुविधाओं से जोड़ा जाए। यह निर्देश जिलाधिकारी सत्येन्द्र कुमार ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को दिए।
मुख्यमंत्री की सर्वोच्च विकास प्राथमिकता कार्यक्रम के तहत निर्धारित 37-बिंदुओं, सीएम डैशबोर्ड और जिले में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं की विभागवार समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने योजनाओं की प्रगति, निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति, लाभार्थियों तक योजनाओं की पहुंच और सीएम डैशबोर्ड पर विभागों की रैंकिंग की बिंदुवार जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी तरीके से किया जाए। सभी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं की प्रगति में तेजी लाएं। जिन योजनाओं की प्रगति अपेक्षित स्तर से कम है, उनके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने पर जोर दिया गया।
सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने विभागवार उपलब्ध आंकड़ों और प्रगति रिपोर्ट का नियमित परीक्षण करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि संबंधित विभाग अपने पोर्टल पर सूचनाओं और आंकड़ों को समय से अपडेट करें तथा वास्तविक प्रगति के अनुरूप डाटा फीडिंग सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिले की रैंकिंग बेहतर करना सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है। डाटा अपडेट में लापरवाही या लक्ष्य के सापेक्ष कम प्रगति के कारण जनपद की रैंकिंग प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य पात्र नागरिकों को समय से लाभ पहुंचाना है। इसलिए पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावी बनाई जाए। ग्राम एवं ब्लॉक स्तर पर शिविर लगाकर लोगों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ आवेदन, सत्यापन और स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।
बैठक में आईजीआरएस के माध्यम से प्राप्त शिकायतों और उनके निस्तारण की भी समीक्षा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के बिना किसी शिकायत को पोर्टल पर अपलोड न किया जाए। शिकायत प्राप्त करते समय हस्ताक्षर कराना अनिवार्य होगा। शिकायत पत्र, उसकी विषयवस्तु और संलग्न दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद ही उसे पोर्टल पर दर्ज करने तथा शिकायतकर्ता से फीडबैक लेने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए शासन की मंशा के अनुरूप विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने और जिले की स्थिति को विभिन्न विकास मानकों पर बेहतर बनाने का आह्वान किया।