वाराणसी : बाल संरक्षण योजनाओं की समीक्षा में डीएम सख्त, पात्र बच्चों और महिलाओं को योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने के निर्देश
वाराणसी। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाल संरक्षण और महिला कल्याण से जुड़ी सभी सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध ढंग से पहुंचाया जाए। उन्होंने विशेष रूप से प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के लाभार्थियों को मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से शत-प्रतिशत जोड़ने तथा पात्र बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के दायरे में लाने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त समीक्षा बैठक में जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति, डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना तथा हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी पंकज कुमार मिश्र ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
समीक्षा में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड एवं सामान्य), स्पॉन्सरशिप योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, बाल देख-रेख संस्थाओं में रह रहे बच्चों की शिक्षा एवं पुनर्वास, दत्तक ग्रहण से जुड़े मामलों, वन स्टॉप सेंटर की कार्यप्रणाली, डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड हेल्पलाइन यूनिट, रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क, बाल कल्याण समिति, हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन तथा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की प्रगति का आकलन किया गया।
बैठक में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत पंजीकृत सभी लाभार्थियों की सूची प्राप्त कर उन्हें मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि यदि स्पॉन्सरशिप योजना के तहत किसी पात्र बच्चे को धनराशि प्राप्त नहीं हो रही है, तो ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर तत्काल मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के अंतर्गत स्वीकृति की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
जिलाधिकारी ने रेलवे स्टेशन, प्रमुख चौराहों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति करने वाले तथा कूड़ा बीनने वाले बच्चों का तत्काल रेस्क्यू कर उन्हें संरक्षण, शिक्षा और पुनर्वास उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। साथ ही दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में शामिल बच्चों को शीघ्र विधिक रूप से गोद लेने के लिए मुक्त घोषित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा, ताकि उन्हें समय पर स्थायी परिवार मिल सके।
उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की अपेक्षा जताते हुए कहा कि बाल संरक्षण और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तत्परता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी प्रखर कुमार सिंह, अपर पुलिस उपायुक्त (महिला अपराध), बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड, जिला बाल संरक्षण इकाई, वन स्टॉप सेंटर, हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं बाल देख-रेख संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।