वाराणसी : मैट्रीमोनियल वेबसाइट के जरिए महिलाओं को फंसाते थे साइबर ठग, करोड़ों की ठगी का पुलिस ने किया भंडाफोड़, सरगना समेत दो गिरफ्तार 

पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मैट्रीमोनियल वेबसाइटों के माध्यम से महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो शातिर साइबर अपराधियों को बिहार के मोतिहारी से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त तीन मोबाइल फोन और 10,200 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
 

वाराणसी। पुलिस कमिश्नरेट की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मैट्रीमोनियल वेबसाइटों के माध्यम से महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत दो शातिर साइबर अपराधियों को बिहार के मोतिहारी से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त तीन मोबाइल फोन और 10,200 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, 13 मार्च को वाराणसी की एक महिला ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ अज्ञात साइबर अपराधियों ने मैट्रीमोनियल वेबसाइट के माध्यम से उनसे संपर्क कर खुद को विदेश में रहने वाला व्यवसायी बताया। बाद में विदेश से महंगे उपहार भेजने का झांसा देकर उनसे विभिन्न शुल्कों के नाम पर बड़ी रकम ठग ली गई। शिकायत के आधार पर थाना साइबर क्राइम में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल के निर्देशन तथा पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान एवं अपर पुलिस उपायुक्त अपराध नृपेन्द्र के पर्यवेक्षण में सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध विदुष सक्सेना के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर टीम ने मोतिहारी, बिहार में दबिश देकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों में पूर्वी चंपारण निवासी विजय कुमार तथा रोहित रंजन शामिल हैं। पूछताछ में सामने आया कि गिरोह विभिन्न मैट्रीमोनियल वेबसाइटों पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर महिलाओं को अपने जाल में फंसाता था। इसके बाद आरोपी स्वयं को विदेश में रहने वाला धनी कारोबारी बताकर महंगे गिफ्ट भेजने की बात करते थे। जब पीड़ित महिलाएं उपहार प्राप्त करने के लिए तैयार हो जाती थीं, तब गिरोह के अन्य सदस्य फर्जी कस्टम अधिकारी, जीएसटी अधिकारी या ड्रग विभाग के अधिकारी बनकर कॉल करते और पार्सल छुड़ाने के नाम पर पैसे जमा कराने का दबाव बनाते थे।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह ने अपने नेटवर्क के माध्यम से करीब 500 फर्जी म्यूल बैंक खाते खुलवाए थे। ठगी से प्राप्त धनराशि इन खातों में ट्रांसफर कर कई स्तरों पर घुमाई जाती थी, जिसके बाद नकद निकासी कर ली जाती थी। इससे साइबर अपराधियों की पहचान करना कठिन हो जाता था।
पुलिस ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ साइबर क्राइम थाना वाराणसी में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज है। साथ ही इनके अन्य आपराधिक मामलों और नेटवर्क से जुड़े सहयोगियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर इस गिरोह से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।