वाराणसी : नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी, युवाओं को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करते थे वसूली, तीन आरोपी गिरफ्तार
वाराणसी। साइबर क्राइम सेल और रोहनिया थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, क्यूआर कोड, आधार कार्ड, प्रशिक्षण दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए हैं।
साइबर क्राइम सेल को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के विश्लेषण के दौरान एक मोबाइल नंबर संदिग्ध मिला, जिसके माध्यम से विभिन्न राज्यों के बेरोजगार युवक-युवतियों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी की जा रही थी। जांच के दौरान प्राप्त तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल के आधार पर रोहनिया क्षेत्र स्थित एक कार्यालय पर छापेमारी की गई। यहां से कृष्ण कुमार और रोशनी प्रजापति को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और आगे की कार्रवाई में उनके सहयोगी अनुपम सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न रोजगार मेलों और अन्य माध्यमों से नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं का डाटा एकत्र करते थे। इसके बाद वे प्रतिष्ठित कंपनियों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। उम्मीदवारों को चयन पत्र, प्रशिक्षण पत्र और अन्य फर्जी दस्तावेज भेजकर विश्वास में लिया जाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क, पुलिस सत्यापन शुल्क, प्रशिक्षण शुल्क, ड्रेस शुल्क, आवास और भोजन व्यय समेत विभिन्न मदों के नाम पर धनराशि वसूली जाती थी।
इतना ही नहीं, प्रशिक्षण के नाम पर अभ्यर्थियों को वाराणसी बुलाकर उन्हें गुमराह भी किया जाता था। पुलिस को जांच में ऐसे कई दस्तावेज मिले हैं, जिनसे पता चलता है कि गिरोह विभिन्न नामी कंपनियों के नाम और प्रतिष्ठा का दुरुपयोग कर रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 9 मोबाइल फोन, कई सिम कार्ड, 3 क्यूआर कोड, 2 आधार कार्ड, चयन एवं प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेज, अभ्यर्थियों के आवेदन पत्र, आधार और पैन कार्ड की प्रतियां, बैंकिंग लेनदेन से जुड़े अभिलेख तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध साइबर धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों की जांच जारी है। पुलिस का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी की रकम के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।