वाराणसी : साइबर अपराधियों का नेटवर्क होगा ध्वस्त, म्यूल अकाउंट और फर्जी कॉल सेंटर पर नजर, पुलिस कमिश्नर ने समीक्षा बैठक में दिए अहम निर्देश
वाराणसी। साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और ठगी के नए तौर-तरीकों को देखते हुए पुलिसिंग में समयानुकूल बदलाव जरूरी है। तकनीकी संसाधनों, साइबर इंटेलिजेंस और त्वरित कार्रवाई के जरिए अपराधियों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचकर प्रभावी कार्रवाई की जाए। यह निर्देश पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय में आयोजित साइबर क्राइम समीक्षा गोष्ठी में दिए।
उन्होंने साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों, अपराधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने को कहा। सभी जोन के साइबर प्रभारी प्रत्येक 15 दिन में प्रगति की समीक्षा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे, ताकि कार्रवाई को और प्रभावी बनाया जा सके।
म्यूल अकाउंट और फर्जी कॉल सेंटर पर नजर
पुलिस आयुक्त ने म्यूल अकाउंट खुलवाने और संचालित करने वालों के साथ साइबर ठगी की रकम निकालने वालों को चिह्नित कर विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए। फर्जी सिम जारी करने वालों, अवैध कॉल सेंटर संचालकों और एटीएम के माध्यम से ठगी की रकम निकालने वाले व्यक्तियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने को कहा।
उन्होंने शिकायतों का विस्तृत परीक्षण कर उनके पंजीकरण, लंबित मामलों में कार्रवाई और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। पीड़ितों को तत्काल सहायता देने और वित्तीय धोखाधड़ी में धनराशि होल्ड कराने के प्रयासों को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
एक साल में 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश
समीक्षा के दौरान वाराणसी साइबर क्राइम पुलिस की पिछले एक वर्ष की उपलब्धियां प्रस्तुत की गईं। पुलिस के अनुसार, इस अवधि में 58 साइबर गैंग का पर्दाफाश कर 277 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। डिजिटल अरेस्ट के पांच मामलों में 36 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। इन मामलों में करीब 1.20 करोड़ रुपये की धनराशि, मोबाइल फोन, चार पहिया वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।
इसी अवधि में 15 अवैध कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ कर 175 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। निवेश, विदेशी नागरिकों से ठगी और नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई।
25 करोड़ रुपये होल्ड, 4.5 करोड़ लौटाए
पुलिस के मुताबिक, एक वर्ष में 16,982 एनसीआरपी शिकायतों का निस्तारण किया गया। साइबर ठगी के मामलों में 25 करोड़ रुपये होल्ड कराए गए, जबकि नियमानुसार प्रक्रिया पूरी कर 4.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को वापस कराए गए।
साइबर अपराध में इस्तेमाल 10,176 मोबाइल नंबर और 8,262 डिवाइस के आईएमईआई ब्लॉक कराए गए। गिरफ्तार आरोपितों में से 21 के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। इसके अलावा 550 लोगों का रेस्क्यू और 17 चार पहिया वाहन बरामद किए गए। जन-जागरूकता अभियान के तहत 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया।
पुलिस आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों और टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कार्रवाई को और परिणामपरक बनाने के निर्देश दिए। बैठक में डीसीपी अपराध नीतू, डीसीपी राजेश कुमार पांडेय, एडीसीपी अपराध नृपेन्द्र, जोन साइबर प्रभारी, थानों के साइबर नोडल अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।