वाराणसी: धर्म परिवर्तन कराकर नाबालिग के साथ की शादी, 4 साल बाद जंसा पुलिस ने अपहृता संग आरोपी को दबोचा

जंसा पुलिस ने चार साल पुराने अपहरण के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, धर्म परिवर्तन कराकर शादी करने और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने अपहृता को भी सकुशल बरामद कर लिया है।
 

वाराणसी। जंसा पुलिस ने चार साल पुराने अपहरण के मामले में बड़ी सफलता हासिल करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर नाबालिग को बहला-फुसलाकर ले जाने, धर्म परिवर्तन कराकर शादी करने और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप हैं। पुलिस ने अपहृता को भी सकुशल बरामद कर लिया है।

जंसा थाना क्षेत्र में वर्ष 2021 से लंबित अपहरण के एक मामले का पुलिस ने सफल खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उपनिरीक्षक पवन कुमार यादव एवं उनकी टीम ने मु0अ0सं0 0247/2021, धारा 363 भादवि से संबंधित मामले में कार्रवाई करते हुए वांछित अभियुक्त रईश अहमद पुत्र रोशन उर्फ एहसानुल हक, निवासी लक्ष्मनपुर इटवरिया, थाना भिनगा, जनपद श्रावस्ती को राजातालाब ओवरब्रिज के पास से गिरफ्तार किया।

पुलिस ने आरोपी के कब्जे से लगभग चार वर्ष पूर्व अपहृत नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया है। मामले के अनुसार, 30 दिसंबर 2021 को वादी ने थाना जंसा में सूचना दी थी कि उनके बड़े भाई की करीब 14 वर्षीय पुत्री 29 दिसंबर की रात घर से लापता हो गई है। काफी खोजबीन के बावजूद कोई सुराग न मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।

विवेचना के दौरान सामने आया कि आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक के जरिए नाबालिग से संपर्क स्थापित किया। इसके बाद उसने शादी का झांसा देकर उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ बहराइच के नानपारा ले गया, जहां उसका धर्म परिवर्तन कराकर विवाह कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी लखनऊ जाने के लिए बनारस होते हुए गुजर रहा था। इसी दौरान जंसा पुलिस ने राजातालाब ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में अब धारा 366, 376(3) भादवि, 5एम/6 पॉक्सो एक्ट तथा 3/5(1) उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं बढ़ाते हुए अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। गौरतलब है कि यह मामला चार वर्षों से लंबित था और अब तक छह विवेचकों द्वारा इसकी जांच की जा चुकी थी, लेकिन अपहृता का कोई सुराग नहीं मिल पाया था। अंततः उपनिरीक्षक पवन कुमार यादव द्वारा किए गए तकनीकी विश्लेषण के आधार पर अहम साक्ष्य मिले, जिससे आरोपी तक पहुंचना संभव हो सका।