वाराणसी : प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से अधिवक्ताओं में रोष, कार्रवाई की मांग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल और दुष्प्रचार किए जाने के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं और आम लोगों में नाराजगी सामने आई है। मामले में संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने तथा आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
 

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर अमर्यादित भाषा के इस्तेमाल और दुष्प्रचार किए जाने के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं और आम लोगों में नाराजगी सामने आई है। मामले में संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाने तथा आरोपों की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से जेन-जी और राम मंदिर से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों से जुड़े कुछ लोगों तथा कथित तौर पर कुछ अधिवक्ताओं की ओर से डीएम पोर्टिको से लेकर जिला मुख्यालय तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक एवं अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ लोगों द्वारा देश के खिलाफ भी भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के निर्वाचित प्रधानमंत्री होने के साथ ही वाराणसी के सांसद भी हैं। ऐसे में सार्वजनिक स्थलों पर उनके खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों और भ्रामक प्रचार से लोगों की भावनाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक संगठन को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों की आलोचना करने तथा शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर अभद्र या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल और देश के विरुद्ध भ्रामक प्रचार किए जाने की शिकायतों को भी कानून के दायरे में जांचा जाना चाहिए।

शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि डीएम पोर्टिको से जिला मुख्यालय तक सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली ऐसी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाए। साथ ही, यदि जांच में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रचलित कानून के तहत प्रभावी कार्रवाई की जाए। मामले को लेकर अधिवक्ताओं और अन्य लोगों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई है कि लोकतांत्रिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए सार्वजनिक मर्यादा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।