बाढ़ से निपटने को वाराणसी प्रशासन पूरी तरह तैयार, 61 राहत शिविर और 198 नावें तैनात

गंगा और वरुणा नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा, त्वरित राहत और बचाव कार्यों के लिए विभिन्न विभागों एवं बचाव एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
 

गंगा-वरुणा के जलस्तर पर लगातार नजर, 21 बाढ़ चौकियां सक्रिय; NDRF, जल पुलिस और PAC की टीमें अलर्ट

संभावित बाढ़ के मद्देनजर राहत एवं बचाव की बहुस्तरीय तैयारी, शिविरों में भोजन-पानी से लेकर स्वास्थ्य और पशुधन की सुरक्षा तक की व्यवस्था

जिले में 61 बाढ़ राहत शिविर चिह्नित, 24 घंटे संचालित हो रहा बाढ़ नियंत्रण कक्ष, निगरानी के लिए 21 बाढ़ चौकियां स्थापित

राहत एवं बचाव के लिए 198 नावों की व्यवस्था, NDRF, जल पुलिस और PAC की टीमें तैयार, राहत शिविरों में तीन समय भोजन की व्यवस्था

पशुधन के लिए भूसा, चारा और उपचार की तैयारी, गंगा के जलस्तर और मौसम की लगातार निगरानी

वाराणसी। गंगा और वरुणा नदियों के जलस्तर में संभावित वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रशासन ने आमजन की सुरक्षा, त्वरित राहत और बचाव कार्यों के लिए विभिन्न विभागों एवं बचाव एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया है। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए जरूरत पड़ने पर लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।


जिले में प्रभावित परिवारों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए 61 बाढ़ राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता और सोने की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। कम्युनिटी किचन के माध्यम से प्रभावित लोगों को प्रतिदिन तीन समय पौष्टिक भोजन देने की व्यवस्था की गई है। शिविरों में साफ-सफाई और स्वच्छता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

शिविरों में तैनात रहेंगी विभागीय टीमें
राहत शिविरों को समेकित सहायता केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। आवश्यकता के अनुसार राजस्व, स्वास्थ्य, पशुपालन, नगर निगम समेत अन्य विभागों की टीमें यहां तैनात रहेंगी। चिकित्सा दल प्राथमिक उपचार और आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराएंगे, जबकि पशुपालन विभाग पशुओं के उपचार और देखभाल की जिम्मेदारी संभालेगा।


पशुधन की सुरक्षा पर भी जोर
संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए भूसे और चारे की व्यवस्था की गई है। पशुपालन विभाग की टीमें टीकाकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक चिकित्सा सहायता के लिए तैयार रहेंगी। जरूरत पड़ने पर पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई है।


21 बाढ़ चौकियां और 198 नावें तैयार
स्थानीय स्तर पर निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए जिले में 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। वहीं राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 198 नावों की व्यवस्था की गई है। इनका उपयोग जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में किया जाएगा। नाव संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन और प्रशिक्षित नाविकों की मदद सुनिश्चित की जाएगी।


NDRF, जल पुलिस और PAC अलर्ट
आपात स्थिति से निपटने के लिए NDRF, जल पुलिस और PAC की टीमें तैयार रखी गई हैं। नदी तटवर्ती और जलभराव वाले इलाकों में जरूरत पड़ने पर इन टीमों को तत्काल भेजकर रेस्क्यू अभियान चलाया जाएगा।


24 घंटे निगरानी में बाढ़ नियंत्रण कक्ष
बाढ़ नियंत्रण कक्ष 24 घंटे संचालित किया जा रहा है। यहां से जलस्तर, मौसम और संभावित प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग और मौसम विभाग से प्राप्त अधिकृत सूचनाओं के आधार पर परिस्थितियों का आकलन कर संबंधित अधिकारियों को तत्काल जानकारी दी जाएगी।

जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि तेज बहाव वाले स्थानों, नदी, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से न जाएं तथा प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन या बाढ़ नियंत्रण कक्ष को सूचना देने की अपील की गई है।