वाराणसी : किसान फूल मंडी में नई व्यवस्था लागू, 62 फूल विक्रेताओं ने नगर निगम से सीधे अनुबंध के लिए किया आवेदन

किसान फूल मंडी (मलदहिया–इंग्लिशिया लाइन) को अवैध कब्जे से मुक्त कराए जाने के बाद नगर निगम ने यहां एक नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी है। इस पहल के तहत अब फूल और माला विक्रेता नगर निगम के साथ सीधे अनुबंध कर वैधानिक रूप से अपना कारोबार कर सकेंगे। नई व्यवस्था के अंतर्गत अब तक द्वितीय पाली के 62 फूल विक्रेताओं ने निगम से अनुबंध के लिए आवेदन कर दिया है।
 

वाराणसी। किसान फूल मंडी (मलदहिया–इंग्लिशिया लाइन) को अवैध कब्जे से मुक्त कराए जाने के बाद नगर निगम ने यहां एक नई और पारदर्शी व्यवस्था लागू कर दी है। इस पहल के तहत अब फूल और माला विक्रेता नगर निगम के साथ सीधे अनुबंध कर वैधानिक रूप से अपना कारोबार कर सकेंगे। नई व्यवस्था के अंतर्गत अब तक द्वितीय पाली के 62 फूल विक्रेताओं ने निगम से अनुबंध के लिए आवेदन कर दिया है।

 

नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, आवेदन करने वाले सभी विक्रेताओं का सत्यापन पूरा होने के बाद उन्हें मंडी परिसर में विधिवत व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी। निगम को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में यह संख्या 100 से अधिक पहुंच जाएगी। इस पहल से मंडी में वर्षों से चली आ रही अवैध वसूली और बिचौलियों की भूमिका पर प्रभावी रोक लगेगी।

 

अनुबंध प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अधिकारी स्वयं फूल विक्रेताओं से सीधे संपर्क बनाए हुए हैं। उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रकार का मध्यस्थ न रहे और निगम व व्यापारियों के बीच सीधा संवाद और करार हो। इससे न केवल विक्रेताओं का आर्थिक शोषण रुकेगा, बल्कि नगर निगम को भी नियमित और वैधानिक राजस्व प्राप्त होगा। इस व्यवस्था से करीब 500 किसानों और व्यापारियों को लाभ मिलने की संभावना है, जिन्हें व्यवस्थित और सुरक्षित स्थान पर कारोबार करने का अवसर मिलेगा।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने स्पष्ट किया कि किसान फूल मंडी की यह भूमि रक्षा संपदा विभाग के स्वामित्व में है और नगर निगम इसके प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मंडी परिसर में नियमों के अनुसार किराया वसूली, स्वच्छता और व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि भविष्य में किसी ने इस भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव ने बताया कि पूर्व में विक्रेताओं से अवैध वसूली की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू की गई है। अनुबंध प्रक्रिया पूरी होने के बाद विक्रेताओं को कानूनी मान्यता मिलेगी और वे बिना किसी दबाव या भय के अपना व्यवसाय कर सकेंगे। राजस्व विभाग को सभी आवेदनों का शीघ्र सत्यापन कर अनुबंध की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।