वाराणसी : गंगा के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन अलर्ट, बाढ़ राहत शिविर में 285 लोगों ने ली शरण, डीएम ने व्यवस्थाओं का लिया जायजा
वाराणसी। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के चलते गंगा और उसकी सहायक नदी वरुणा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। गंगा का पानी अब चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है, जबकि वरुणा नदी में बैक स्लो के कारण तटवर्ती इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के साथ ही बाढ़ राहत शिविरों को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय किया जा रहा है।
इसी क्रम में जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने पुराने पुल स्थित यूनाइटेड स्कूल में बनाए गए बाढ़ राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को भोजन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं समेत सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों को तत्काल दूर करने के निर्देश भी दिए गए।
जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले दो दिनों से गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब 30 सेंटीमीटर नीचे है। उन्होंने बताया कि वरुणा नदी में बैक स्लो के चलते नदी के किनारे बसे इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। डीएम के अनुसार वरुणा घाट, सरैया, कोनिया और सलारपुर समेत कई तटवर्ती मोहल्लों में नदी के किनारे बने घरों तक पानी पहुंच गया है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रभावित इलाकों में नावों की व्यवस्था की गई है और लोगों को सतर्क करने के लिए लगातार अनाउंसमेंट कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले में फिलहाल छह बाढ़ राहत शिविर सक्रिय हैं, जहां करीब 285 लोग पहुंच चुके हैं। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पूरे जनपद में कुल 61 बाढ़ राहत शिविर निर्धारित किए गए हैं। आवश्यकता बढ़ने पर इन शिविरों को चरणबद्ध तरीके से सक्रिय किया जाएगा। राहत शिविरों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ खानपान और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था भी की गई है। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और उन्हें किसी तरह की परेशानी न होने देना है। प्रशासन जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।