वाराणसी के सूजाबाद डोमरी में विकसित होगा ‘शहरी वन, नगर निगम को होगी सात करोड़ की सालाना आय
वाराणसी। काशी की पवित्र धरती पर पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी मिसाल पेश करने की तैयारी है। नगर निगम की ओर से सूजाबाद डोमरी क्षेत्र में एक विशाल ‘शहरी वन’ विकसित किया जाएगा। यहां लगभग 350 बीघा में विकसित होने वाला शहरी वन' न केवल शहर की आबोहवा को शुद्ध करेगा, बल्कि आर्थिक स्वावलंबन का नया मॉडल भी बनेगा। इससे नगर निगम को सालाना सात करोड़ की आय होने की संभावना है। इसको लेकर महापौर अशोक कुमार तिवारी ने शुक्रवार को अधिकारियों संग मीटिंग की।
महापौर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लिए मध्यप्रदेश की एमबीके नामक संस्था से एक समझौता किया गया है जो तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये देगी। वहीं सातवें वर्ष तक पहुंचते-पहुंचते सात करोड़ रुपये वार्षिक तक होने की संभावना है। यहां मियावाकी तकनीक के साथ-साथ औषधीय पौधों (आयुर्वेद) और फूलों की खेती का भी अनूठा संगम देखने को मिलेगा। यह केवल एक बगीचा नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर इको-सिस्टम है। यहां मियावाकी वन के साथ-साथ फलों के बाग, आयुर्वेद की खेती और फूलों की खेती का अद्भुत समन्वय है।
मियावाकी पद्धति और आधुनिक तकनीकों के संगम से एक मार्च को यहां तीन लाख से अधिक पौधों का रोपण कर शहरी वन' का शुभारंभ किया जाएगा । यह परियोजना न केवल गंगा के किनारों को मजबूती देगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक शुद्ध ऑक्सीजन बैंक के रूप में कार्य करेगी।
स्मार्ट सिंचाई सिस्टम
भीषण गर्मी (मार्च-जून) में पौधों की प्यास बुझाने के लिए सप्ताह में तीन बार 45 मिनट की विशेष सिंचाई का शेड्यूल तय किया गया है। सिंचाई के लिए यहां पांच बोरवेल स्थापित किए गए हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि भीषण गर्मी (मार्च-जून) के दौरान भी पौधों को सप्ताह में 3 बार उचित नमी मिलती रहे। वन में बांस, कचनार, महुआ, और हरसिंगार जैसे कुल 27 प्रकार के देशी पेड़ शामिल हैं।
नगर निगम को होगी आय
परियोजना के तीसरे वर्ष आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार पेड़ो और अश्वगंधा, शतावरी, गिलोय और एलोवेरा जैसे औषधीय पौधों तथा गुलाब, चमेली और पारिजात (हरसिंगार) के फूलों से राजस्व मिलना शुरू हो जाएगा । ऐसे में तीसरे वर्ष निगम को दो करोड़ रुपये मिलेगा । वहीं पांचवें वर्ष पांच करोड़, , छ्ठे वर्ष छ्ह करोड़ तथा सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
मार्च में ही परियोजना का शुभारंभ क्यों
विशेषज्ञों के मुताबिक मार्च का प्रथम सप्ताह इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सबसे अनुकूल है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और भौगोलिक कारण हैं। मानसून आने से पहले पौधों को रोपित करने से उनकी जड़ों को जमने का पूरा समय मिल जाता है, जिससे उनके जीवित रहने की दर (Survival Rate) काफी बढ़ जाती है।
वन के फायदे
गंगा तट पर स्थित होने के कारण यहां मिट्टी के कटाव का खतरा रहता है। बरसात से पहले फैली जड़ें मिट्टी को बांधकर कटाव रोकने में सुरक्षा चक्र का काम करेंगी। अप्रैल-मई की भीषण गर्मी शुरू होने से पहले पौधे नए वातावरण में ढल जाते हैं।
इन प्रजातियों के लगेंगे पौधे
यहां शीशम और अर्जुन जैसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है, जो नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहने में सक्षम हैं।
आंकड़ों में परियोजना की एक झलक
पाइपलाइन का जाल: 10,827} मीटर
आधुनिक सिंचाई: 360 रेन गन स्प्रिंकलर
कुल अनुमानित आय: 19.80 करोड़ रुपये (5 वर्षों में)
सिंचाई नेटवर्क 10827 मीटर पाइपलाइन और 10 बोरवेल
तकनीकी उपकरण 360 तक 'रेन गन' स्प्रिंकलर सिस्टम
चार किलोमीटर पाथवे
अनुमानित राजस्व 19.80 करोड़ (पांच वर्षों में)
इन पौधों का होगा रोपण
शीशम: 35,171
सागौन: 14,371
अर्जुन: 13,671
सप्तपर्णी: 13,071
बाँस: 12,371
पीपल: 11,421
महुआ: 10,771
शीशम (हाइब्रिड): 14,071
महोगनी: 11,021
बकैन: 9,971
चिलबिल: 8,371
कैजुराइना/झाऊ: 7,371
चितवन: 6,071
अमरूद: 24,121
आम: 19,421
अनार: 14,771
शहतूत: 12,771
नींबू: 10,371
करौंदा: 8,071
बेल: 3,971
कचनार: 11,771
चांदनी: 9,371
गुड़हल: 9,071
हरसिंगार/पारिजात: 7,771
बोतल ब्रश: 7,071
मनोकामिनी: 6,371
एलिका: 4,821
जंगल जलेबी: 7,022
कुल योग: 3,17,120