यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के बाद सारनाथ पहुंचे केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, बोले- बौद्ध पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सारनाथ के शामिल होने के बाद केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को सारनाथ पहुंचकर ऐतिहासिक धरोहरों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्तूप परिसर का अवलोकन किया और इसे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बौद्ध समुदाय के लिए गौरव का विषय बताया।
 

वाराणसी। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में सारनाथ के शामिल होने के बाद केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को सारनाथ पहुंचकर ऐतिहासिक धरोहरों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्तूप परिसर का अवलोकन किया और इसे भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के बौद्ध समुदाय के लिए गौरव का विषय बताया।

 

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पूरे देशवासियों के लिए सौभाग्य का क्षण है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में सारनाथ की प्राचीन धरोहर को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिला है। उन्होंने बताया कि यह भारत की 45वीं यूनेस्को विश्व धरोहर साइट है, जो देश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाएगी।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सारनाथ भगवान बुद्ध से जुड़े चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहीं भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, जिसने पूरी दुनिया में शांति, करुणा और अहिंसा का संदेश फैलाया। उन्होंने कहा कि सारनाथ का विश्व धरोहर सूची में शामिल होना केवल उत्तर प्रदेश या काशी की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का विषय है।

 

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि यूनेस्को का दर्जा मिलने के बाद सारनाथ में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे स्थानीय पर्यटन, रोजगार और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर नई पहचान प्राप्त होगी।

उन्होंने बताया कि सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया जनवरी 2025 में शुरू की गई थी। इसके तहत कई चरणों में तकनीकी परीक्षण, विशेषज्ञों की बैठकें, निरीक्षण और विस्तृत मूल्यांकन हुआ। लंबी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यूनेस्को ने सारनाथ को विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्रदान की।

 

शेखावत ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से भारत लगातार अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को वैश्विक पहचान दिलाने में सफल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि काशी की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश का नेतृत्व सौंपा, जिसके बाद काशी के विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को भी नई गति मिली। उन्होंने विश्वास जताया कि सारनाथ का यह सम्मान आने वाले वर्षों में भारत के सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा।