मिशन महादेव के तहत राजकीय विद्यालयों में होगा बड़ा बदलाव, मेधावी छात्रों के लिए आईआईटी व मेडिकल की निःशुल्क तैयारी

पीएम श्री राजकीय क्वींस कॉलेज में नए शैक्षणिक सत्र से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। ‘मिशन महादेव’ के अंतर्गत विद्यालय को आधुनिक और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सक्षम बनाना है।
 

वाराणसी। पीएम श्री राजकीय क्वींस कॉलेज में नए शैक्षणिक सत्र से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जा रहे हैं। ‘मिशन महादेव’ के अंतर्गत विद्यालय को आधुनिक और प्रतिस्पर्धात्मक शिक्षा के अनुरूप विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए सक्षम बनाना है।

विद्यालय प्रशासन के अनुसार इस सत्र से छात्रों के लिए विशेष शैक्षणिक योजनाएं लागू की जाएंगी। टॉप-30 मेधावी छात्रों का चयन कर उन्हें आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी कराई जाएगी। इसके लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की टीम गठित की जाएगी, जो विद्यार्थियों को नियमित मार्गदर्शन और अभ्यास कराएगी। प्रधानाचार्य ने बताया कि इस पहल का लक्ष्य ग्रामीण एवं सामान्य पृष्ठभूमि के छात्रों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाना है।

मिशन महादेव के तहत शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और समग्र विकास पर भी जोर दिया जाएगा। विद्यालय में वैदिक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का समन्वय करते हुए संस्कारयुक्त वातावरण तैयार किया जाएगा। छात्रों में अनुशासन, सामाजिक समरसता, वैज्ञानिक सोच और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

इस सत्र से विद्यालय में चार बड़े परिवर्तन लागू किए जाएंगे। पहली बार सभी छात्रों को नियमित मूल्यांकन के आधार पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। दूसरी ओर, चयनित 30 छात्रों को उन्नत अध्ययन सामग्री और अतिरिक्त कक्षाओं की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। तीसरे चरण में विद्यालय को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए स्मार्ट क्लास और आधुनिक संसाधनों की व्यवस्था की जाएगी। चौथे चरण में कक्षा 6 से 11 तक अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई प्रारंभ की जाएगी, जिससे छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार हो सकें।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन परिवर्तनों से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे भविष्य में बेहतर करियर विकल्प चुन सकेंगे। शिक्षा के क्षेत्र में यह पहल सरकारी विद्यालयों के लिए एक नई दिशा साबित हो सकती है।