अस्सी घाट पर मां के साथ गंगा में डूब रहे दो मासूमों को बचाया, निषादराज सेवा समिति के सदस्यों ने दिखाई बहादुरी

अस्सी घाट पर गुरुवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गंगा आरती समाप्त होने के बाद करीब पौने नौ बजे एक महिला ने अपने दो दूधमुंहे बच्चों के साथ गंगा में छलांग लगा दी। तीनों को डूबता देख घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। इसी दौरान मां गंगा निषादराज सेवा समिति के सदस्यों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बिना देर किए गंगा में छलांग लगा दी और महिला सहित दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
 

वाराणसी। अस्सी घाट पर गुरुवार की रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गंगा आरती समाप्त होने के बाद करीब पौने नौ बजे एक महिला ने अपने दो दूधमुंहे बच्चों के साथ गंगा में छलांग लगा दी। तीनों को डूबता देख घाट पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। इसी दौरान मां गंगा निषादराज सेवा समिति के सदस्यों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए बिना देर किए गंगा में छलांग लगा दी और महिला सहित दोनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

समिति के अनुसार, घटना के समय अभिषेक साहनी, करण साहनी, दीपक साहनी, कमलेश साहनी और शुभम साहनी सहित अन्य सदस्य आनंद काशी क्रूज के पास मौजूद थे। महिला और दोनों बच्चों को गहरे पानी में डूबता देख सभी ने अपनी जान की परवाह किए बिना बचाव अभियान शुरू कर दिया। काफी मशक्कत के बाद तीनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। उनकी तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

मां गंगा निषादराज सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार निषाद गुरु ने सदस्यों की बहादुरी और मानवता के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए सभी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि संकट के समय समिति के सदस्यों ने जिस तत्परता से महिला और बच्चों की जान बचाई, वह सराहनीय है।

उन्होंने प्रदेश और केंद्र सरकार से मांग की कि जल पुलिस, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन में स्थानीय मल्लाह समुदाय के प्रशिक्षित गोताखोरों की नियुक्ति की जाए, ताकि गंगा घाटों पर होने वाली दुर्घटनाओं के दौरान तत्काल बचाव कार्य किया जा सके।