श्रद्धा, साहित्य और संस्कृति का संगम बना तुलसी मानस मंदिर, स्वचालित झांकियां और दीवारों पर अंकित मानस की पंक्तियां करती हैं आकर्षित

धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में स्थित दुर्गाकुंड क्षेत्र का श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मंदिर सावन मास के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। आध्यात्मिक वातावरण, भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की मनोहारी स्वचालित झांकियां तथा संगमरमर की दीवारों पर अंकित संपूर्ण रामचरितमानस इस मंदिर की विशिष्ट पहचान हैं। सावन में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के साथ झांकियों का आनंद लेने पहुंचते हैं। शाम ढलते ही मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ और भक्ति संगीत से गुलजार हो उठता है।
 

रिपोर्ट - ओमकार नाथ

वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में स्थित दुर्गाकुंड क्षेत्र का श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मंदिर सावन मास के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। आध्यात्मिक वातावरण, भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की मनोहारी स्वचालित झांकियां तथा संगमरमर की दीवारों पर अंकित संपूर्ण रामचरितमानस इस मंदिर की विशिष्ट पहचान हैं। सावन में यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के साथ झांकियों का आनंद लेने पहुंचते हैं। शाम ढलते ही मंदिर परिसर भक्तों की भीड़ और भक्ति संगीत से गुलजार हो उठता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मंदिर उसी पावन स्थल पर स्थित है, जहां 16वीं शताब्दी में महान संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास ने लोकभाषा अवधी में रामचरितमानस की रचना की थी। यही कारण है कि यह स्थान केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि भारतीय साहित्य और संस्कृति की अमूल्य धरोहर के रूप में भी विशेष महत्व रखता है। वर्तमान संगमरमर का भव्य मंदिर वर्ष 1964 में सुरेका परिवार द्वारा निर्मित कराया गया था, जिसकी वास्तुकला और शिल्पकला श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है।

मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता इसकी संगमरमर की दीवारों पर अंकित संपूर्ण रामचरितमानस है। श्रद्धालु परिक्रमा करते हुए रामचरितमानस के दोहे, चौपाइयों और विभिन्न प्रसंगों का पाठ एवं दर्शन कर सकते हैं। दीवारों पर भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों की सुंदर नक्काशी और चित्रांकन मंदिर की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाते हैं।

गर्भगृह में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और भक्त हनुमान की मनोहारी प्रतिमाएं विराजमान हैं। इसके अतिरिक्त मंदिर परिसर में भगवान सत्यनारायण, भगवान शिव और माता अन्नपूर्णा के भी मंदिर स्थित हैं। हरे-भरे उद्यान, फव्वारे और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को मानसिक शांति और आध्यात्मिक सुकून का अनुभव कराते हैं।

सावन मास में मंदिर को आकर्षक विद्युत सज्जा, रंग-बिरंगे फूलों और विशेष अलंकरण से सजाया जाता है। इस दौरान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित स्वचालित झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होती हैं। शाम के समय मंदिर परिसर "जय श्रीराम" के उद्घोष और भक्ति संगीत से गूंज उठता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

दुर्गाकुंड, संकटमोचन मंदिर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के निकट स्थित होने के कारण यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों में शामिल है। सावन के पावन अवसर पर श्री सत्यनारायण तुलसी मानस मंदिर केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि गोस्वामी तुलसीदास की अमर साहित्यिक विरासत, रामभक्ति और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रतीक बनकर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहता है।