सावन में इस बार चार सोमवार, पांच बृहस्पतिवार और पांच शुक्रवार का दुर्लभ संयोग, बाबा विश्वनाथ के दर्शन को उमड़ेगा भक्तों का सैलाब
वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी एक बार फिर शिवभक्ति के रंग में रंगने को तैयार है। भगवान शिव के प्रिय सावन मास की शुरुआत इस वर्ष 30 जुलाई, बृहस्पतिवार से होगी। सावन का आगमन होते ही काशी के मंदिरों, घाटों और गलियों में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजने लगेंगे। पूरे माह श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, भजन-कीर्तन और विविध धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा।
सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को पड़ेगा, जबकि अंतिम सोमवार 24 अगस्त को होगा। सावन मास की पूर्णाहुति 28 अगस्त को श्रावणी पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के पर्व के साथ होगी। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए काशी पहुंचेंगे।
इस बार सावन में बनेगा विशेष संयोग
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात ज्योतिषविद् प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ मास में मलमास पड़ने के कारण सावन की शुरुआत सामान्य वर्षों की तुलना में विलंब से हो रही है। हालांकि इस बार सावन में कई दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहे हैं।
सावन मास में चार सोमवार, पांच बृहस्पतिवार और पांच शुक्रवार पड़ेंगे। बृहस्पतिवार भगवान विष्णु तथा शुक्रवार मां लक्ष्मी और भगवती की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में भक्त भगवान शिव के साथ-साथ श्रीहरि विष्णु और मां भगवती की आराधना कर विशेष पुण्य अर्जित करेंगे।
विश्वनाथ धाम में विशेष तैयारियां
सावन के दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। मंदिर प्रशासन द्वारा दर्शन-पूजन, सुरक्षा, बैरिकेडिंग, पेयजल, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की जाएंगी। हर सोमवार और शिवरात्रि के अवसर पर लाखों श्रद्धालु बाबा का जलाभिषेक करेंगे।
काशी के प्रमुख शिवालयों जैसे महामृत्युंजय महादेव मंदिर, तिलभांडेश्वर महादेव, मार्कण्डेय महादेव, केदारेश्वर महादेव, ओंकारेश्वर महादेव और अन्य शिव मंदिरों में भी विशेष पूजन-अर्चन का आयोजन होगा।
निकलेगी कांवड़ यात्राएं और जलयात्राएं
सावन मास में कांवड़ यात्राओं का विशेष महत्व होता है। गंगाजल लेकर शिवालयों में जलाभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु काशी आएंगे। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक संस्थाओं और अखाड़ों द्वारा जलयात्राएं निकाली जाएंगी। पूरे माह शिवभक्ति से जुड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
शिवभक्ति में डूबेगी काशी
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत, तप और साधना का श्रेष्ठ काल माना जाता है। मान्यता है कि इस माह श्रद्धापूर्वक भगवान शिव का पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
काशी में सावन का महत्व विशेष है क्योंकि यह स्वयं भगवान शिव की नगरी है। ऐसे में पूरे माह मंदिरों की घंटियां, हर-हर महादेव के उद्घोष, कांवड़ियों की टोलियां और गंगा तटों पर होने वाले धार्मिक आयोजन काशी को पूर्णतः शिवमय बना देंगे।
सावन में पड़ने वाले प्रमुख पर्व और तिथियां
सावन मास में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार भी पड़ रहे हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व माना जाता है।
- 30 जुलाई – सावन मास का प्रारंभ
- 3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
- 9 अगस्त – कामदा एकादशी
- 10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार
- 11 अगस्त – मासिक शिवरात्रि
- 12 अगस्त – हरियाली अमावस्या
- 14 अगस्त – धर्मसम्राट करपात्री महाराज जयंती
- 15 अगस्त – हरियाली तीज (कजरी तीज)
- 17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार एवं नागपंचमी
- 23 अगस्त – पुत्रदा एकादशी
- 24 अगस्त – चौथा एवं अंतिम सावन सोमवार
- 28 अगस्त – श्रावणी पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन, सावन मास की पूर्णाहुति