शरद पूर्णिमा पर काशी में खुलेगा तीसरा अन्नक्षेत्र, बिंदु माधव मंदिर में मिलेगी महाप्रसाद की सुविधा
25 अक्टूबर को होगा पुनः शुभारंभ, प्रतिदिन दो घंटे तक श्रद्धालुओं को कराया जाएगा भोजन
एक पंगत में 60 से 70 लोग कर सकेंगे प्रसाद ग्रहण
श्वेतांबर स्वरूप में दर्शन देंगे भगवान बिंदु माधव, खीर और माखन का लगेगा महाभोग
वाराणसी। काशी में मां अन्नपूर्णा मंदिर और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर अन्नक्षेत्र के बाद अब पंचगंगा घाट स्थित बिंदु माधव मंदिर में तीसरे विशाल अन्नक्षेत्र का संचालन शुरू होने जा रहा है। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर को इसका विधिवत पुनः शुभारंभ किया जाएगा। इसके लिए मंदिर परिसर में निर्माण और नवीनीकरण का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। अन्नक्षेत्र शुरू होने से मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं, संतों और जरूरतमंदों को भोजन एवं महाप्रसाद की सुविधा मिलेगी।
बिंदु माधव न्यास के ट्रस्टी एवं मंदिर के महंत पं. मुरलीधर गणेश पटवर्धन ने बताया कि अन्नक्षेत्र की शुरुआत पिछले वर्ष की गई थी, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों और व्यवस्थागत सुधारों के चलते पिछले तीन महीनों से इसका संचालन बंद था। अब सभी आवश्यक बाधाओं को दूर कर शरद पूर्णिमा से इसे दोबारा श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तैयारी है।
एक साथ 60 से 70 श्रद्धालु ग्रहण करेंगे महाप्रसाद
मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठकर भोजन करने के लिए विशेष डाइनिंग हॉल तैयार किया जा रहा है। इसमें एक पंगत में 60 से 70 श्रद्धालु एक साथ बैठकर महाप्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन दोपहर के समय दो घंटे तक भोजन की व्यवस्था रहेगी। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पारंपरिक सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
श्वेतांबर स्वरूप में सजेगा बिंदु माधव मंदिर
शरद पूर्णिमा पर भगवान बिंदु माधव का विशेष श्वेतांबर शृंगार किया जाएगा। श्वेत वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित भगवान की मनोहारी झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। भोर में मंगला आरती के बाद मंदिर के कपाट दर्शनार्थियों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद क्रमवार शृंगार आरती संपन्न होगी।
खीर और माखन का लगेगा महाभोग
पर्व पर भगवान बिंदु माधव को पारंपरिक रूप से विशेष खीर और ताजे माखन का महाभोग अर्पित किया जाएगा। मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों में अमृत तत्व होता है। इसी धार्मिक विश्वास के तहत खीर को पूरी रात चांदनी में रखने के बाद अगले दिन सुबह मंगला दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। इसे आरोग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।