मंदिर में चंदा नहीं, चढ़ावा होता है', राम मंदिर प्रकरण पर काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने उठाए कई सवाल

वाराणसी। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच देशभर में मंदिरों में दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात धर्माचार्य आचार्य अशोक द्विवेदी ने मंदिर प्रबंधन, चढ़ावे की व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित राशि को "चंदा" नहीं बल्कि "चढ़ावा" या "दक्षिणा" कहा जाना चाहिए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सत्य को सामने लाया जाना चाहिए।
 

वाराणसी। अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच देशभर में मंदिरों में दान और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी मुद्दे पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रख्यात धर्माचार्य आचार्य अशोक द्विवेदी ने मंदिर प्रबंधन, चढ़ावे की व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित राशि को "चंदा" नहीं बल्कि "चढ़ावा" या "दक्षिणा" कहा जाना चाहिए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सत्य को सामने लाया जाना चाहिए।

'चंदा नहीं, श्रद्धालुओं का चढ़ावा होता है'
आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि किसी धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित धन को चंदा कहना उचित नहीं है। उनके अनुसार चंदा किसी विशेष उद्देश्य के लिए रसीद के साथ लिया जाता है, जबकि मंदिरों में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और आस्था से भगवान को चढ़ावा अर्पित करते हैं। इसलिए यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसे "चढ़ावा चोरी" या "चढ़ावा गबन" कहा जाना अधिक उचित होगा।

काशी विश्वनाथ मंदिर का उदाहरण देकर कही यह बात
आचार्य द्विवेदी ने दावा किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर में भी अतीत में चढ़ावे की गिनती के दौरान अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। उनका कहना था कि नकदी गिनने की प्रक्रिया में बैंक कर्मचारियों द्वारा गड़बड़ी की घटनाएं हुई थीं, जिन्हें उन्होंने स्वयं पकड़ा था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बाद में वहां व्यवस्थाओं में सुधार किया गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार किसी एक मंदिर तक सीमित नहीं होता, बल्कि जहां निगरानी और पारदर्शिता कमजोर होती है, वहां ऐसी आशंकाएं बढ़ जाती हैं।

चंपत राय पर सवाल के जवाब में जांच एजेंसियों पर जताया भरोसा
राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की संभावित गिरफ्तारी के सवाल पर आचार्य द्विवेदी ने कहा कि यह निर्णय जांच एजेंसियों और पुलिस को करना है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी स्तर पर चोरी, गबन या वित्तीय गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

'दान के आभूषण गलाने के बजाय बने संग्रहालय'
आचार्य अशोक द्विवेदी ने सुझाव दिया कि मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं को गलाने के बजाय उनका एक भव्य संग्रहालय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में दानदाताओं का विवरण भी सुरक्षित रखा जाए, ताकि यह धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में संरक्षित रह सके। उनका कहना था कि सनातन परंपरा में देव प्रतिमाओं और धार्मिक आभूषणों को गलाना उचित नहीं माना गया है। यदि भविष्य में कभी आवश्यकता हो तो पूरी पारदर्शिता के साथ नीति बनाकर उनका उपयोग किया जा सकता है।

पूजा-पद्धति पर भी उठाए सवाल
आचार्य द्विवेदी ने श्रीराम मंदिर की वर्तमान पूजा-पद्धति पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंदिर में वैदिक परंपराओं के अनुरूप एक स्पष्ट, सर्वमान्य और शास्त्रसम्मत पूजा व्यवस्था निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि सभी धार्मिक अनुष्ठान एक समान परंपरा और विधि के अनुसार संचालित हों।

उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में पारदर्शी व्यवस्था, वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा, बल्कि मंदिरों की गरिमा और सनातन परंपराओं की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।

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