काशी में थीम आधारित होलिका दहन: चेतगंज में ‘एलियंस’ संग जलेगी होलिका, शहर भर में दिखेगा परंपरा और नवाचार का संगम

आध्यात्मिक नगरी काशी में इस वर्ष होली का पर्व एक नए अंदाज में मनाया जाएगा। सदियों पुरानी परंपरा के साथ इस बार शहर में पहली बार बड़े स्तर पर थीम आधारित होलिका दहन की तैयारी की गई है। विभिन्न मोहल्लों में पारंपरिक स्वरूप के साथ समकालीन विषयों और कल्पनाशील आकृतियों को मूर्त रूप देकर विशेष प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगी।
 

वाराणसी। आध्यात्मिक नगरी काशी में इस वर्ष होली का पर्व एक नए अंदाज में मनाया जाएगा। सदियों पुरानी परंपरा के साथ इस बार शहर में पहली बार बड़े स्तर पर थीम आधारित होलिका दहन की तैयारी की गई है। विभिन्न मोहल्लों में पारंपरिक स्वरूप के साथ समकालीन विषयों और कल्पनाशील आकृतियों को मूर्त रूप देकर विशेष प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बनेंगी।

सबसे चर्चित आयोजन चेतगंज क्षेत्र में होगा, जहां ‘एलियंस’ थीम पर आधारित विशाल होलिका प्रतिमा तैयार की गई है। न्यू सागर स्पोर्टिंग क्लब के विशाल जायसवाल और राहुल सोनकर की परिकल्पना पर मूर्ति शिल्पी अभिजीत विश्वास ने इस अनूठी प्रतिमा को आकार दिया है। प्रतिमा के पृष्ठभाग में विभिन्न प्रकार के एलियंस की आकृतियां बनाई गई हैं-कुछ जानवरों जैसी तो कुछ इंसानी चेहरे से मिलती-जुलती, लेकिन शरीर की बनावट बेहद विचित्र। आयोजकों का कहना है कि यह बदलते समय में बुराई के नए रूपों और आधुनिक कल्पनाओं का प्रतीकात्मक चित्रण है।

गुरुधाम इलाके में भी एक विशेष थीम पर होलिका तैयार की जा रही है। यहां अहिराबीर बाबा होलकी माई स्पोर्टिंग क्लब द्वारा किशन गुप्ता के नेतृत्व में आयोजन किया जा रहा है। शिल्पी अभिजीत विश्वास की बनाई प्रतिमा के पीछे एक समकालीन घटना का दृश्य दर्शाया गया है, जिसमें पेड़ की डाल पर लटकते व्यक्ति और उसे जलाने का प्रयास करता दूसरा व्यक्ति दिखाया गया है। आयोजकों के अनुसार इसका उद्देश्य समाज को अमानवीय कृत्यों और सामाजिक बुराइयों के प्रति जागरूक करना है।

कश्मीरीगंज में करीब 12 फीट ऊंची ‘मॉडर्न होलिका’ तैयार की जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार होलिका रूप बदलने में माहिर थी, इसी विचार को आधार बनाकर फिल्मी अंदाज में सजी होलिका को काला चश्मा लगाए आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जो दिखावे और आडंबर पर व्यंग्य करती नजर आएगी। लहरतारा क्षेत्र में 13 फीट ऊंची प्रतिमा में होलिका को एक हाथ में भक्त प्रह्लाद और दूसरे में तलवार लिए दर्शाया जाएगा। वहीं दारानगर में राक्षसी रूप में होलिका को प्रह्लाद पर खंजर से वार करते हुए दिखाया गया है, जो बुराई की चरम क्रूरता का प्रतीक होगा।


आयोजकों का कहना है कि काशी की पहचान परंपरा और प्रयोग के संगम में है। इस बार थीम आधारित होलिकाएं न केवल आकर्षण का केंद्र बनेंगी, बल्कि सामाजिक संदेश देने का माध्यम भी होंगी। प्रशासन द्वारा भी सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं, ताकि सभी स्थानों पर शांतिपूर्ण ढंग से होलिका दहन संपन्न हो सके।