वाराणसी में 61 मीटर के ऊपर गंगा का जलस्तर, घाटों किनारे जलकुंभी, श्रद्धालुओं को परेशानी दूर करने में जुटे नाविक और पंडा समाज

काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ अब घाटों पर जलकुंभी का जमाव भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के शुक्रवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा का जलस्तर 61.05 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण ऊपरी क्षेत्रों से बहकर आई बड़ी मात्रा में जलकुंभी अस्सी घाट, बदरीनाथ घाट सहित कई स्थानों के किनारों पर जमा हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
 

वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के साथ अब घाटों पर जलकुंभी का जमाव भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के शुक्रवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के अनुसार गंगा का जलस्तर 61.05 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण ऊपरी क्षेत्रों से बहकर आई बड़ी मात्रा में जलकुंभी अस्सी घाट, बदरीनाथ घाट सहित कई स्थानों के किनारों पर जमा हो गई है, जिससे श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

सुबह गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं को जलकुंभी की मोटी परत के बीच होकर पानी तक पहुंचना पड़ा। कई स्थानों पर जलकुंभी इतनी अधिक मात्रा में जमा हो गई कि लोगों को सुरक्षित तरीके से स्नान करने में दिक्कत हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमित रूप से इसकी सफाई नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

श्रद्धालुओं की परेशानी को देखते हुए नाविक समाज और पंडा समाज ने स्वयं सफाई अभियान की जिम्मेदारी संभाल ली है। नाविक अपनी नावों की सहायता से घाटों के किनारे जमा जलकुंभी को हटाकर गंगा की धारा से बाहर निकाल रहे हैं, जबकि पंडा समाज के लोग घाटों की सीढ़ियों और स्नान स्थलों की सफाई कर श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने में जुटे हैं। उनका कहना है कि काशी आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

इधर, गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन की चिंता भी बढ़ा रहा है। फिलहाल विश्व प्रसिद्ध अस्सी घाट की गंगा आरती अपने निर्धारित स्थान पर ही संपन्न हो रही है, लेकिन यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो सुरक्षा की दृष्टि से आरती स्थल को ऊंचे प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित किया जा सकता है। पूर्व वर्षों में भी बाढ़ जैसे हालात बनने पर गंगा आरती को अस्थायी रूप से ऊपरी हिस्से में आयोजित किया गया था।

घाटों पर तैनात स्वयंसेवक और स्थानीय लोग श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं। तेज होती धारा और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों से केवल निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान करने तथा प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने को कहा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार बारिश का सिलसिला अभी जारी रहने की संभावना है। साथ ही गंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से लगातार पानी आने के कारण अगले कुछ दिनों में जलस्तर और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और आवश्यकता पड़ने पर घाटों की व्यवस्थाओं तथा गंगा आरती के आयोजन में आवश्यक बदलाव करने की तैयारी भी कर रहा है।