वाराणसी में वार्निंग लेवल को छूने लगा गंगा का जलस्तर, घाट और मंदिर डूबे, गलियों में घुसा पानी, तटवर्ती इलाके के लोगों के लिए बढ़ी परेशानी
वाराणसी। गंगा का जलस्तर सोमवार की शाम चार बजे चेतावनी बिंदु को छूने लगा। गंगा का पानी घाटों और किनारे को डुबाते गुए गलियों में घुसने लगा है। श्मशान घाट भी डूब गया है। इसके चलते शवदाह में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा।
पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि का असर अब काशी के घाटों और तटवर्ती इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियां पार कर आसपास की गलियों और निचले हिस्सों तक पहुंच गया। अस्सी घाट पर ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच पानी में डूब गया, जबकि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। उधर, वरुणा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में भी पलट प्रवाह से जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
केंद्रीय जल आयोग के राजघाट गेज स्थल के अनुसार सोमवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.90 मीटर दर्ज किया गया था और पानी करीब दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था। वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। इस तरह सुबह की रीडिंग चेतावनी स्तर से महज करीब 36 सेंटीमीटर नीचे थी। शाम तक जलस्तर में और वृद्धि दर्ज की गई।
अस्सी घाट पर बदला नजारा
गंगा का पानी बढ़ने के साथ अस्सी घाट की निचली सीढ़ियां और आसपास के रास्ते जलमग्न हो गए। पुराने अस्सी घाट की ओर जाने वाली गलियों तक पानी पहुंचने के बाद दुकानदारों को अपना सामान पीछे सड़क की ओर ले जाना पड़ा। चाय-पान, खानपान, पूजा सामग्री और फूल-माला बेचने वालों का कारोबार प्रभावित हुआ है। ‘सुबह-ए-बनारस’ का मंच भी पानी की चपेट में आ गया है।
जलस्तर बढ़ने से गंगा आरती का स्थान भी ऊंचे हिस्से में स्थानांतरित करना पड़ा। घाटों पर आवाजाही सीमित होने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को परेशानी हो रही है। नाविकों और घाट किनारे काम करने वाले लोगों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ा है।
मणिकर्णिका घाट पर अंतिम संस्कार प्रभावित
मणिकर्णिका घाट का निचला हिस्सा पानी में डूबने से शवों को घाट तक पहुंचाने में मुश्किलें बढ़ गई हैं। आसपास की गलियों में पानी आने के कारण शवयात्रियों को जलभराव के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। घाट पर सीमित स्थान बचने से अंतिम संस्कार के लिए लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ अंतिम संस्कार घाट के ऊंचे हिस्से में कराए जा रहे हैं।
वरूणा किनारे भी बढ़ी परेशानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी के किनारे बसे इलाकों में भी दिखाई दे रहा है। सरैया, सलारपुर और नख्खीघाट समेत कई क्षेत्रों में पानी पहुंचने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों के रहने और भोजन की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नावें और राहत-बचाव दल तैनात किए गए हैं। जलस्तर की लगातार निगरानी के साथ लोगों से नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है। गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के बेहद करीब होने के कारण आने वाले घंटे काशी के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।