गंगा के जलस्तर में वृद्धि, अंत्येष्टि के लिए करना पड़ रहा इंतजार, हरिश्चंद्र घाट पर गलियों में शवदाह

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने काशी में जनजीवन के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी बढ़ने के कारण शवदाह के लिए उपलब्ध स्थान लगातार कम होता जा रहा है। सोमवार से मणिकर्णिका घाट की छत और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सीमित जगह के कारण शवों की संख्या बढ़ने पर परिजनों को अपनी बारी के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
 

वाराणसी। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने काशी में जनजीवन के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था को भी प्रभावित किया है। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी बढ़ने के कारण शवदाह के लिए उपलब्ध स्थान लगातार कम होता जा रहा है। सोमवार से मणिकर्णिका घाट की छत और हरिश्चंद्र घाट की गलियों में अंतिम संस्कार किया जा रहा है। सीमित जगह के कारण शवों की संख्या बढ़ने पर परिजनों को अपनी बारी के लिए दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।

मोक्षनगरी काशी में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने पहुंचते हैं। ऐसे में घाटों पर बनी मौजूदा स्थिति उनके लिए भावनात्मक पीड़ा के साथ व्यवस्थागत परेशानी भी बढ़ा रही है। गंगा का पानी लगातार घाटों की सीढ़ियों और आसपास के रास्तों की ओर बढ़ रहा है। इससे शवदाह के लिए सामान्य दिनों में इस्तेमाल होने वाली जगह प्रभावित हुई है।

गीली लकड़ियों से लग रहा समय
बारिश और बाढ़ के पानी के कारण शवदाह के लिए रखी लकड़ियां भी गीली हो गई हैं। गीली लकड़ियों में चिता जलने में अधिक समय लग रहा है। पहले से सीमित स्थान और अधिक संख्या में शव पहुंचने के कारण एक शव के अंतिम संस्कार में लगने वाला अतिरिक्त समय दूसरे परिजनों के इंतजार को बढ़ा रहा है।

हरिश्चंद्र घाट पर पहुंचे लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील स्थिति में परिवार पहले ही मानसिक तनाव से गुजरता है। ऐसे में घाट पर बैठने, प्रकाश, पेयजल, शौचालय और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं होने से परेशानी और बढ़ जाती है।

नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल
स्थानीय लोगों ने घाट पर सफाई और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि बाढ़ की स्थिति के बावजूद घाट पर साफ-सफाई, प्रकाश, पेयजल और बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही है। बारिश के कारण घाट और आसपास के हिस्सों में गंदगी बढ़ गई है।

 

लोगों का कहना है कि हरिश्चंद्र घाट केवल स्थानीय लोगों के अंतिम संस्कार का स्थल नहीं है, बल्कि देशभर से लोग यहां अंतिम संस्कार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में बाढ़ और जलस्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन को यहां अतिरिक्त व्यवस्थाएं करनी चाहिए।