वाराणसी में बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती के लिए लगी छतरी और लाइटें हटाई गईं

सावन माह के दौरान गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से काशी के घाटों की तस्वीर बदलने लगी है। इसका असर विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती पर भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को एहतियात के तौर पर आरती स्थल से छतर (छाते) और विद्युत सज्जा के लिए लगाई गई लाइटों को हटा दिया गया। प्रशासन और गंगा आरती समिति ने यह कदम बढ़ते जलस्तर से उपकरणों को सुरक्षित रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।
 

वाराणसी। सावन माह के दौरान गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से काशी के घाटों की तस्वीर बदलने लगी है। इसका असर विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती पर भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार को एहतियात के तौर पर आरती स्थल से छतर (छाते) और विद्युत सज्जा के लिए लगाई गई लाइटों को हटा दिया गया। प्रशासन और गंगा आरती समिति ने यह कदम बढ़ते जलस्तर से उपकरणों को सुरक्षित रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया है।

गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए जिला प्रशासन, गंगा सेवा समिति और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि शनिवार को भी जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा, तो विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का आयोजन अपने पारंपरिक स्थान के बजाय घाट की ऊपरी सीढ़ियों या किसी सुरक्षित वैकल्पिक स्थल पर कराया जा सकता है। इस संबंध में अंतिम निर्णय जलस्तर की स्थिति का आकलन करने के बाद लिया जाएगा।

सावन के महीने में काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रहती है। हर शाम दशाश्वमेध घाट पर आयोजित होने वाली गंगा आरती को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन किसी भी प्रकार का जोखिम लेने के पक्ष में नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए घाटों पर पुलिस, जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

गंगा आरती समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जलस्तर और बढ़ता है तो बिना किसी जोखिम के सुरक्षित स्थान पर आरती संपन्न कराई जाएगी। समिति लगातार जलस्तर की निगरानी कर रही है और प्रशासन के साथ समन्वय बनाए हुए है।

उधर, बढ़ते जलस्तर का असर घाटों के निचले हिस्सों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर सीढ़ियों का निचला भाग पानी में डूबने लगा है, जिससे नाविकों और घाट किनारे छोटे कारोबार करने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे गंगा के किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं, जलधारा के समीप सेल्फी लेने या भीड़ लगाने से बचें तथा जारी सुरक्षा निर्देशों का पूरी तरह पालन करें।

फिलहाल सभी की निगाहें शनिवार के जलस्तर पर टिकी हैं। यदि गंगा का बढ़ाव जारी रहता है, तो काशी की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती पहली बार इस सावन में अपने पारंपरिक स्थल के बजाय वैकल्पिक स्थान से आयोजित की जा सकती है। प्रशासन और आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी आवश्यक निर्णय समयानुसार लिए जाएंगे।