काशी का अनोखा सारंगनाथ मंदिर : एक साथ विराजते हैं भगवान शिव और सारंग ऋषि, दो शिवलिंगों का होता है जलाभिषेक
वाराणसी। काशी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काशी के कण-कण में महादेव का वास है। यही वजह है कि वाराणसी में कदम-कदम पर प्राचीन शिवालय और उनसे जुड़ी अद्भुत पौराणिक कथाएं देखने-सुनने को मिलती हैं। इन मंदिरों में कई ऐसे भी हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं उन्हें अन्य शिवालयों से अलग पहचान देती हैं। ऐसा ही एक अनोखा मंदिर है सारंगनाथ मंदिर, जहां भगवान शिव के साथ उनके साले माने जाने वाले सारंग ऋषि भी शिवलिंग स्वरूप में विराजमान हैं।
सारंगनाथ मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित दो शिवलिंग हैं। श्रद्धालुओं के बीच मान्यता है कि दोनों शिवलिंग स्वयंभू हैं और प्राचीन काल से यहां विराजमान हैं। मंदिर में आने वाले भक्त दोनों शिवलिंगों का एक साथ दर्शन करते हैं और दोनों पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं। एक ही स्थान पर दो शिवलिंगों की पूजा की यह परंपरा मंदिर को काशी के अन्य शिवालयों से विशिष्ट बनाती है।
एक ही स्थान पर दो शिवलिंगों की पूजा
सारंगनाथ मंदिर में दो शिवलिंग अगल-बगल विराजमान बताए जाते हैं। धार्मिक आस्था के अनुसार इनमें एक भगवान शिव का और दूसरा सारंग ऋषि का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु दोनों शिवलिंगों पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं। सावन और महाशिवरात्रि जैसे प्रमुख पर्वों पर यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है।
मान्यता है कि मंदिर में दोनों शिवलिंगों का एक साथ पूजन करने से भगवान शिव के साथ सारंग ऋषि का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। यही वजह है कि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां पहुंचकर दोनों शिवलिंगों का जलाभिषेक करना विशेष पुण्यकारी मानते हैं।
भगवान शिव के साथ क्यों विराजमान हैं सारंग ऋषि?
सारंगनाथ मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा भगवान शिव और माता सती से जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार सारंग ऋषि को माता सती का भाई माना जाता है। कथा के मुताबिक प्रारंभ में सारंग ऋषि भगवान शिव और माता सती के विवाह के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने इस विवाह का विरोध किया था।
बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी। लंबे समय तक तपस्या करने के बाद भगवान शिव सारंग ऋषि से प्रसन्न हुए। धार्मिक मान्यता के अनुसार महादेव ने उन्हें वरदान दिया कि वे उनके साथ ही विराजमान रहेंगे।
इसी मान्यता को सारंगनाथ मंदिर में मौजूद दो शिवलिंगों से जोड़कर देखा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि एक शिवलिंग भगवान शिव का और दूसरा सारंग ऋषि का स्वरूप है।
स्वप्न में हुआ काशी और महादेव का दर्शन
मंदिर से जुड़ी धार्मिक कथा में यह भी बताया जाता है कि सारंग ऋषि को एक समय स्वप्न में काशी और भगवान शिव के दर्शन हुए। इस दिव्य अनुभव के बाद उन्हें अपनी भूल का बोध हुआ और उन्होंने महादेव की आराधना शुरू कर दी।
सारंग ऋषि की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपने साथ रहने का वरदान दिया। इसी कारण काशी में सारंगनाथ के रूप में भगवान शिव के साथ सारंग ऋषि की उपस्थिति की मान्यता प्रचलित हुई। श्रद्धालु इस कथा को भगवान शिव की करुणा और भक्त की तपस्या के फल से जोड़कर देखते हैं।
सावन में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़
सावन के महीने में भगवान शिव के मंदिरों में विशेष धार्मिक उत्साह देखने को मिलता है। सारंगनाथ मंदिर में भी सावन के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। भक्त सुबह से ही मंदिर पहुंचकर भगवान शिव और सारंग ऋषि के दोनों शिवलिंगों पर जलाभिषेक करते हैं।
कांवड़िए भी गंगाजल लेकर मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठता है। सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है।
महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर सारंगनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पर्व के दिन तड़के से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। श्रद्धालु भगवान शिव के दोनों स्वरूपों का दर्शन कर जल, दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
महाशिवरात्रि पर मंदिर में होने वाली पूजा और जलाभिषेक को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। इस दिन मंदिर परिसर में धार्मिक वातावरण और भी अधिक जीवंत हो जाता है।
काशी के प्राचीन शिवालयों में अलग पहचान
काशी में भगवान शिव को समर्पित अनेक प्राचीन मंदिर हैं और प्रत्येक मंदिर की अपनी अलग मान्यता है। सारंगनाथ मंदिर की पहचान दो शिवलिंगों और उनसे जुड़ी पौराणिक कथा के कारण है। यहां भगवान शिव के साथ सारंग ऋषि की आराधना की परंपरा श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्था के कारण सारंगनाथ मंदिर आज भी काशी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर में एक साथ दो शिवलिंगों का दर्शन और जलाभिषेक भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। काशी के इस अनोखे शिवालय की यही विशेषता इसे शहर के अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती है और महादेव की नगरी की समृद्ध धार्मिक परंपरा में सारंगनाथ मंदिर की अपनी विशिष्ट जगह बनाती है।