काशी में दुर्गोत्सव की अनूठी छटा, कहीं 18 फीट की दुर्गा प्रतिमा तो कहीं सिंदूरदान की परंपरा, पंडालों में उमड़ रहे श्रद्धालु 

धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्गा पूजा की छटा देखते ही बन रही है। शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। कहीं बंगाल की पारंपरिक मूर्तिकला और पूजा पद्धति के दर्शन हो रहे हैं तो कहीं वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराएं निभाई जा रही हैं। भेलूपुर स्थित जिम स्पोर्टिंग क्लब में मां दुर्गा की 18 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है, जबकि नवापुरा स्थित माता लक्ष्मी दुर्गा पूजा नवयुवक समिति के पंडाल में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूरदान कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
 

वाराणसी। धर्म और संस्कृति की नगरी काशी में शारदीय नवरात्र के अवसर पर दुर्गा पूजा की छटा देखते ही बन रही है। शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही हैं। कहीं बंगाल की पारंपरिक मूर्तिकला और पूजा पद्धति के दर्शन हो रहे हैं तो कहीं वर्षों पुरानी धार्मिक परंपराएं निभाई जा रही हैं। भेलूपुर स्थित जिम स्पोर्टिंग क्लब में मां दुर्गा की 18 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है, जबकि नवापुरा स्थित माता लक्ष्मी दुर्गा पूजा नवयुवक समिति के पंडाल में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक सिंदूरदान कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

एकचाला प्रतिमा और चांदी के आभूषण आकर्षण
भेलूपुर के जिम स्पोर्टिंग क्लब में वर्ष 1960 से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा चली आ रही है। इस बार यहां लगभग 18 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। बंगाल की पारंपरिक शैली में बनी एकचाला प्रतिमा में मां दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं के स्वरूप भी एक ही कलात्मक संरचना में समाहित हैं। प्रतिमा को चांदी के मुकुट और आभूषणों से सजाया गया है। मां के मस्तक पर सुशोभित चांदी का मुकुट और चंद्रमा विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।

यहां बंगाली विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया जा रहा है। दर्शन के लिए श्रद्धालु लगातार पहुंच रहे हैं। पंडाल में प्रसाद वितरण और भंडारे की व्यवस्था भी की गई है। छह दशक से अधिक समय से जारी यह आयोजन काशी में बंगाली समाज की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम बना हुआ है।

नवापुरा में 1990 से निभाई जा रही सिंदूरदान की परंपरा
नवापुरा स्थित माता लक्ष्मी दुर्गा पूजा नवयुवक समिति के पंडाल में अष्टमी पर पारंपरिक सिंदूरदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर विधि-विधान से पूजा की। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। समिति की ओर से यह परंपरा वर्ष 1990 से निभाई जा रही है।

कार्यक्रम में क्षेत्र के पूर्व पार्षद किशोर सेठ ने कहा कि सिंदूरदान भारतीय संस्कृति में सुहाग, प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है। ऐसे आयोजन लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ सामाजिक मेलजोल को भी बढ़ावा देते हैं।

सामूहिक सहभागिता से जीवंत हो रही संस्कृति
नवापुरा के कार्यक्रम में समिति अध्यक्ष रविशंकर सिंह, अरुण सिंह, शुभम पटेल, पप्पू यादव और प्रकाश सेठ सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे। दोनों आयोजनों में श्रद्धालुओं की सहभागिता ने धार्मिक उत्साह को बढ़ाया। भव्य प्रतिमा, बंगाली पूजा पद्धति और पारंपरिक सिंदूरदान के जरिए काशी में आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है।