पुलिस कमिश्नर ने सिगरा थाने का किया निरीक्षण, लंबित विवेचनाओं पर उपनिरीक्षक को अल्टीमेटम, तकनीकी पुलिसिंग पर दिया जोर

शहर में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया है। सिगरा थाने पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक और निरीक्षण के दौरान उन्होंने लंबित विवेचनाओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित उपनिरीक्षकों (एसआई) को कड़ी चेतावनी दी।
 

वाराणसी। शहर में पुलिसिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने के लिए पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने सख्त रुख अपनाया है। सिगरा थाने पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक और निरीक्षण के दौरान उन्होंने लंबित विवेचनाओं पर नाराजगी जताते हुए संबंधित उपनिरीक्षकों (एसआई) को कड़ी चेतावनी दी।

कमिश्नर ने स्पष्ट निर्देश दिया कि कोई भी विवेचना 60 दिन से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए। जिन मामलों में देरी पाई गई, उन एसआई को एक सप्ताह के भीतर सभी लंबित जांच पूरी करने का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने साफ कहा कि तय समयसीमा में सुधार न होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान पुलिस कमिश्नर ने नए भर्ती आरक्षियों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की। हाल ही में प्रशिक्षण पूरा कर थानों में तैनात हुए 40 से 50 नए आरक्षियों को बीट प्रणाली और आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें क्षेत्र में बेहतर निगरानी और सूचना संकलन के लिए ‘यक्ष ऐप’ के उपयोग की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही सभी नए पुलिसकर्मियों को ‘त्रिनेत्र केंद्र’ का भ्रमण कराने के निर्देश दिए गए हैं, जहां वे सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य डिजिटल माध्यमों से अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को समझेंगे। कमिश्नर ने कहा कि आधुनिक पुलिसिंग में तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है, इसलिए हर पुलिसकर्मी को डिजिटल सिस्टम में दक्ष होना जरूरी है।

उन्होंने थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि वे नए आरक्षियों को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित करें और उन्हें फील्ड में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार करें। साथ ही सिगरा थाने के चौकी प्रभारियों की कार्यशैली की भी समीक्षा की गई, जहां धीमी विवेचना को लेकर उन्हें फटकार लगाई गई। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि सीखने की ललक ही किसी पुलिसकर्मी को विभाग का मजबूत एसेट बनाती है। उन्होंने बताया कि आज एफआईआर से लेकर पूरी जांच प्रक्रिया CCTNS पोर्टल पर आधारित है, ऐसे में तकनीकी ज्ञान के बिना प्रभावी पुलिसिंग संभव नहीं है।

 

निरीक्षण और बैठक के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराध नियंत्रण के लिए टेक्नोलॉजी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। पुलिस विभाग में कार्यकुशलता बढ़ाने के इस अभियान से आने वाले समय में शहर की कानून-व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।