नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बाधा डालकर विपक्ष ने देश की महिलाओं के साथ किया छल, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी दलों पर मढ़ा आरोप 

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बुधवार को वाराणसी पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बात की। इस दौरान लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास न होने के लिए विपक्षी दलों पर आरोप लगाए। 
 

वाराणसी। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बुधवार को वाराणसी पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस में मीडिया से बात की। इस दौरान लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पास न होने के लिए विपक्षी दलों पर आरोप लगाए। 

उन्होंने आरोप लगाया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने में बाधा डालकर विपक्ष ने देश की महिलाओं के साथ “छल” किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर जश्न मनाना नारी शक्ति का अपमान है और देश की महिलाएं इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगी।

मेघवाल ने जानकारी दी कि हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान 16 से 18 अप्रैल तक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें लोकसभा में तीन अहम विधेयकों पर संयुक्त चर्चा हुई। इनमें प्रमुख था 131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026, जिसका उद्देश्य वर्ष 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक है, जो कोविड-19 महामारी के कारण विलंबित हो गई थी।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 815 करने का प्रस्ताव लेकर आई है। इसके तहत 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। साथ ही दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी सीटों के पुनर्गठन की योजना प्रस्तावित है।

हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। समाजवादी पार्टी ने धर्म आधारित आरक्षण की मांग उठाई, जबकि डीएमके ने दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों पर चिंता जताई। वहीं कांग्रेस ने परिसीमन प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए।

सरकार की ओर से यह आश्वासन दिया गया कि सभी राज्यों का प्रतिनिधित्व संतुलित रखा जाएगा और किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। बावजूद इसके, राजनीतिक सहमति नहीं बन पाने के कारण महिला आरक्षण को लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल अधूरी रह गई है। मेघवाल ने कहा कि यह पहल महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन विपक्ष की असहमति के चलते इसमें देरी हो रही है, जिससे देश की महिलाओं में असंतोष बढ़ सकता है। पत्रकार वार्ता में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी उपस्थित रहे।