पवित्र जल से भगवान जगन्नाथ का महाभिषेक, भक्तों के प्रेम में अस्वस्थ होंगे जगत के नाथ, 14 दिनों के बाद रथ पर सवार होकर देंगे दर्शन
वाराणसी। अस्सी क्षेत्र स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के बीच धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगाजल एवं अन्य पवित्र जल से भव्य महाभिषेक किया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और देर रात तक दर्शन-पूजन एवं भजन-कीर्तन का क्रम निरंतर चलता रहा। पूरे परिसर में "जय जगन्नाथ" के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा। भक्तों के प्रेम में भगवान जगन्नाथ अस्वस्थ होने के बाद अज्ञातवास में रहेंगे। स्वस्थ होने पर रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे और अपने भक्तों को दर्शन देंगे।
स्नान पूर्णिमा के अवसर पर परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को विशेष रूप से श्वेत वस्त्र धारण कराकर मंदिर की छत पर विराजमान किया गया, जहां से भक्तों ने उनके दुर्लभ दर्शन किए। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। श्रद्धालुओं ने भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगलमय जीवन की कामना की। महाभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों और शंखध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान को गंगाजल से स्नान कराया। भक्तों ने पुष्प, चंदन, तुलसी, फल एवं विविध प्रकार के भोग अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। मंदिर परिसर में दिनभर भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया।
दर्शन-पूजन के दौरान समाजसेवी बृजेश सिंह अपनी पत्नी के साथ मंदिर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक कर आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने समाज में सुख, शांति, समृद्धि और मानव कल्याण की प्रार्थना करते हुए सभी के जीवन में खुशहाली की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर महाभिषेक के बाद भगवान जगन्नाथ अपने भक्तों के प्रेम और स्नेह से भाव-विभोर होकर अस्वस्थ हो जाते हैं। इसके बाद वे 14 दिनों के लिए अनवसर काल (अज्ञातवास) में चले जाते हैं। इस अवधि में भगवान के सार्वजनिक दर्शन बंद रहते हैं और उनकी विशेष सेवा की जाती है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान को औषधीय गुणों से युक्त काढ़ा एवं विशेष भोग अर्पित किया जाता है, जिससे वे स्वस्थ होते हैं।
अनवसर काल समाप्त होने के बाद भगवान जगन्नाथ नवयौवन स्वरूप में अपने भक्तों को पुनः दर्शन देंगे। इसके बाद भगवान डोली और रथयात्रा के माध्यम से नगर भ्रमण करेंगे। इस पावन यात्रा का श्रद्धालु पूरे वर्ष इंतजार करते हैं और बड़ी संख्या में इसमें शामिल होकर भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन ने पर्याप्त संख्या में सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। स्वयंसेवकों ने भी श्रद्धालुओं को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराने में सहयोग किया।
सुबह से देर रात तक चले इस धार्मिक आयोजन में अस्सी क्षेत्र के अलावा शहर के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन कर स्वयं को धन्य माना। भजन, कीर्तन, शंखध्वनि और जयघोष के बीच संपन्न हुआ स्नान पूर्णिमा महोत्सव काशी के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में एक बार फिर आस्था और सनातन परंपरा का भव्य स्वरूप प्रस्तुत कर गया।