सेंट्रल जेल में सलाखों के पीछे भी कायम रहा भाई-बहन का प्यार, 18 जिलों से पहुंचीं बहनें, भाइयों को बांधी राखी
वाराणसी। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर वाराणसी के केंद्रीय कारागार में भाई-बहन के स्नेह और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। जेल में बंद भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए करीब 18 जिलों से बड़ी संख्या में महिला परिजन पहुंचीं। बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और उनकी कलाई पर राखी बांधकर सुखी और सुरक्षित जीवन की कामना की। इस दौरान कई परिवारों के लिए मुलाकात का यह पल बेहद भावुक रहा।
कारागार प्रशासन ने रक्षाबंधन को देखते हुए महिला परिजनों की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए थे। जेल अधिकारियों के अनुसार, सामान्य तौर पर रक्षाबंधन के दिन कारागार में अवकाश रहता है, लेकिन मुख्यमंत्री, प्रदेश सरकार और कारागार मुख्यालय के निर्देश पर इस बार बंदियों को बहनों और महिला परिजनों से मुलाकात की अनुमति दी गई।
केवल महिला परिजनों को प्रवेश
रक्षाबंधन के दिन कारागार में केवल महिला परिजनों को प्रवेश दिया गया। इनमें बहनें, माताएं, बेटियां और पत्नियां शामिल रहीं। प्रवेश से पहले आगंतुकों का नाम दर्ज कर उनका क्रम निर्धारित किया गया। इसके बाद निर्धारित समूहों में बंदी भाइयों को बुलाकर परिजनों से मुलाकात कराई गई। जेल प्रशासन के मुताबिक करीब 18 जिलों से महिलाएं अपने बंदी भाइयों को राखी बांधने के लिए पहुंचीं। दूर-दराज से आने वाली महिलाओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए कारागार के बाहर टेंट, कुर्सी-मेज, पेयजल, मिष्ठान और जलपान की व्यवस्था की गई थी।
समूहों में कराई गई मुलाकात
मुलाकात की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए सुबह करीब आठ बजे से महिलाओं को समूहों में कारागार परिसर में प्रवेश दिया गया। करीब 80 से 100 महिलाओं के समूह बनाकर क्रमवार मुलाकात कराई गई। इससे अधिक से अधिक परिजन कम समय में अपने बंदी भाइयों से मिल सके। मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक लगाया और राखी बांधी। भाइयों ने भी बहनों का स्नेह स्वीकार किया। लंबे समय बाद हुई इस मुलाकात के दौरान कई परिवारों की आंखें नम नजर आईं।
बहनें नहीं पहुंचीं तो भी राखी की व्यवस्था
जेल अधिकारी ने बताया कि जिन बंदियों की बहनें किसी कारणवश जेल नहीं पहुंच पाती हैं, उनके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों के सहयोग से राखी बांधने की व्यवस्था की जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि कोई भी बंदी रक्षाबंधन के अवसर पर अपनेपन और भाई-बहन के स्नेह से वंचित न रहे।
कर्मचारियों को विनम्र व्यवहार के निर्देश
रक्षाबंधन को लेकर जेल कर्मचारियों को महिला परिजनों के साथ सम्मानजनक और विनम्र व्यवहार करने के निर्देश दिए गए। सुरक्षा व्यवस्था के साथ मुलाकात की प्रक्रिया को सहज बनाने पर भी विशेष जोर रहा। वरिष्ठ जेल अधीक्षक राधा कृष्ण मिश्रा ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, आत्मीयता और सुरक्षा की भावना का पर्व है। जेल की दीवारें भले ही अपनों से दूरी बनाती हों, लेकिन रिश्तों और स्नेह की डोर को कमजोर नहीं कर सकतीं।