ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बंद का मिलाजुल असर, लंका क्षेत्र में कुछ घंटों बाद सामान्य हुई स्थिति, जरूरतमंदों को मिली दवाई
वाराणसी।ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी कंपनियों के विरोध में बुधवार को वाराणसी में दवा व्यापारियों ने बंदी और प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। शहर के महावीर मंदिर रोड, सप्तसागर मंडी और लंका क्षेत्र समेत कई इलाकों में मेडिकल स्टोर आंशिक रूप से बंद रहे। हालांकि जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के लिए कई दुकानदार समय-समय पर दवाएं उपलब्ध कराते नजर आए।
महावीर मंदिर रोड स्थित अधिकांश मेडिकल स्टोर बंद रहे और व्यापारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग की। व्यापारियों का कहना था कि ई-फार्मेसी कंपनियों की वजह से पारंपरिक मेडिकल व्यवसाय पर गहरा असर पड़ रहा है। उनका आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना पर्याप्त जांच और डॉक्टर की सलाह के दवाओं की बिक्री की जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
प्रदर्शन में शामिल दवा व्यापारी विजय कुमार अस्थाना ने कहा कि ऑनलाइन दवा बिक्री पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई दवाएं मरीजों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं, लेकिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी बिक्री की पर्याप्त निगरानी नहीं हो रही है। उन्होंने बताया कि बंदी के दौरान नर्सिंग होम और कुछ आवश्यक मेडिकल स्टोरों को छूट दी गई थी ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो।
वहीं दवा व्यापारी अभय गोयल ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान स्थानीय मेडिकल स्टोरों ने घर-घर जाकर लोगों तक दवाएं पहुंचाईं, जबकि अब ऑनलाइन कंपनियों को भारी सब्सिडी देकर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता और प्रामाणिकता की समुचित जांच नहीं होती, जिससे नकली या गलत दवा मरीजों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है।
इधर लंका क्षेत्र में बंदी का असर सीमित दिखाई दिया। सुबह के समय कई दुकानों के शटर बंद रहे, लेकिन जरूरतमंद मरीजों के पहुंचने पर दुकानदार दवाएं देते रहे। शुरुआती दो से तीन घंटे तक लोगों को कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा, लेकिन दोपहर लगभग एक बजे के बाद अधिकांश मेडिकल स्टोर पूरी तरह खुल गए और दवा बिक्री सामान्य हो गई।
दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी कंपनियां भारी छूट देकर छोटे मेडिकल व्यापारियों के अस्तित्व पर संकट खड़ा कर रही हैं। संगठन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त कानून बनाने, फर्जी प्रिस्क्रिप्शन पर रोक लगाने और छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा करने की मांग की है। व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
हालांकि बंदी के शुरुआती घंटों में मरीजों को परेशानी हुई, लेकिन दोपहर तक हालात सामान्य हो गए और बाजार में दवाओं की उपलब्धता पहले जैसी हो गई। पूरे दिन दवा व्यापारियों, मरीजों और आम लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा।